Sugarcane Farming : चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ के माध्यम से महाराष्ट्र के सभी गन्ना किसानों के लिए राहत की खबर सामने आ रही है| दरअसल, अब तक प्रदेश की ज्यादातर चीनी मिलें गन्ना खरीदने में झिझकती थीं, जो मिल में ले जाने से पहले किसानों द्वारा नापी जाती थी।

लेकिन अब चीनी मिल मालिकों के लिए मतगणना के बाद निजी स्रोतों से लाया गया गन्ना खरीदना अनिवार्य कर दिया गया है| दरअसल, चीनी मिलों के स्वामित्व वाले निजी तौल कांटे और तौल कांटे दोनों ही सत्यापन विभाग द्वारा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं।

इससे गन्ने को निजी कांटे से गिने जाने वाले गन्ने से खारिज नहीं किया जा सकता है। अब चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने आदेश जारी कर कहा है कि, निजी कांटे से गिने जाने वाले गन्ने को फैक्ट्रियां खारिज नहीं कर सकती हैं| इस संबंध में चीनी आयुक्त की ओर से सर्कुलर जारी किया गया है|

साथ ही चीनी मिलें निजी पैमानों से गन्ना तौलने पर संबंधित किसानों और गन्ना ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ धमकी देकर कार्रवाई न करें| आदेश में इसका भी जिक्र है। साथ ही चीनी कारखाने में गन्ने के वजन व निजी तौल कांटे में अंतर होने पर संबंधित किसान क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक चीनी से शिकायत कर सकते हैं| क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक शुगर दोनों पक्षों की बात सुनने वाले हैं।

किसान भाई चीनी मिल की बात सुनेंगे और संबंधित क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक सही फैसला देंगे| इसका जिक्र चीनी आयुक्त ने भी आदेश में किया है| किसान भाइयों को हमेशा संदेह होता है कि फैक्ट्रियों द्वारा गन्ने के वजन में हेराफेरी की जाती है।

इससे उक्त चीनी आयुक्तालय के परिपत्र के अनुसार अब निजी कांटों पर मापा गया गन्ना चीनी मिलों को स्वीकार करना होगा, गन्ना किसानों की शंकाओं का समाधान होगा और गन्ने की गिनती में पारदर्शिता आएगी|

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