7th Pay Commission : सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बेहद जरूरी खबर सामने आई है। कोरोना काल में सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बंद कर दिया गया था। लगभग सरकारी कर्मचारियों को 18 माह से महंगाई भत्ते का लाभ नहीं दिया गया है| यानी कर्मचारियों का 18 महीने का महंगाई भत्ता सरकार ने रोक दिया था|

दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान सरकारी कर्मचारियों के काम करने पर भी महंगाई भत्ता पर रोक लगा दी गई है। इससे कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को उक्त अवधि में महंगाई भत्ता देना कानूनन अनिवार्य है और कर्मचारी संघ की ओर से बार-बार मांग की जा रही है कि 18 माह की अवधि का बकाया महंगाई भत्ता दिया जाए|

सरकारी कर्मचारियों को जल्द से जल्द भुगतान किया जाए। कर्मचारियों की मांग है कि सरकारी कर्मचारियों को एकमुश्त महंगाई भत्ता का भुगतान किया जाए या एकमुश्त निपटारा किया जाए। इस बीच कोरोना काल में 18 महीने के महंगाई बकाए को लेकर एक अहम अपडेट हाथ आया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कर्मचारियों के 18 माह की अवधि के बकाया महंगाई भत्ते के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा| इसका कारण यह है कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में सरकारी कर्मचारियों के गुस्से को कम करने के लिए सरकार को यह फैसला लेना है।

फिलहाल इन दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ऐसे में संभावना है कि केंद्र सरकार कर्मचारियों के बहुचर्चित मसले यानी कोरोना के दौरान 18 महीने का महंगाई भत्ता बकाया और पुरानी पेंशन योजना लागू करने को लेकर सही फैसला लेगी| अगर केंद्र सरकार इस संबंध में सकारात्मक फैसला लेती है और महंगाई भत्ता बकाया या एकमुश्त निपटारा जारी करती है तो कर्मचारियों को फायदा होगा।

एकमुश्त बंदोबस्त के लिए महंगाई भत्ते में चार से पांच प्रतिशत की एकमुश्त वृद्धि दी जा सकती है। साथ ही, यदि महंगाई भत्ते का बकाया भुगतान किया जाता है, तो कर्मचारियों को पूरे एरियर का भुगतान केवल एक बार किया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वित्त विभाग द्वारा इस संबंध में एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

इससे एकमुश्त निपटान के आधार पर कर्मचारियों को 18 महीने की अवधि में महंगाई भत्ता बकाया वितरित करने के कदम की चर्चा हुई है।

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