7th Pay Commission : मित्रों, महाराष्ट्र राज्य के राज्य कर्मचारी अपनी लंबित मांगों के शीघ्र निपटारे के लिए सरकार को बयान देते रहे हैं|

जानकारों का कहना है कि, राज्य कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना सबसे अहम मांग है| दोस्तों, हम यहां आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि, देश के पांच राज्यों ने नई पेंशन योजना को रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल कर दिया है।

इससे राज्य में सरकारी कर्मचारी भी पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के लिए आक्रामक हो रहे हैं। दरअसल, 2005 के बाद महाराष्ट्र राज्य सरकार की सेवा में आए कर्मचारियों के लिए एक नई पेंशन योजना लागू की गई है। नई पेंशन योजना में कई खामियां पाई जाती हैं, इसलिए सरकारी कर्मचारी पिछले कई वर्षों से उक्त पेंशन योजना को रद्द करने और पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

इस बीच, महाराष्ट्र राज्य राजपत्रित महासंघ ने महाराष्ट्र राज्य सरकार को एक अल्टीमेटम जारी किया है। महासंघ की ओर से कहा गया है कि, अगर महाराष्ट्र राज्य सरकार 15 नवंबर तक राज्य कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान नहीं करती है तो महासंघ आंदोलन का झंडा बुलंद करेगा|

साथियों, महाराष्ट्र राज्य राजपत्रित महासंघ की ओर से कर्मचारियों के कल्याण के लिए पुरानी पेंशन योजना को लागू करने, केंद्र के अनुसार बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता लागू करने, सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष करने और लागू करने की भी मांग की गई है| बख्शी समिति खंड -2 रिपोर्ट। विशेष रूप से उक्त मांगें राज्य के अन्य कर्मचारी संगठनों द्वारा समय-समय पर की गई हैं और विभिन्न संगठनों द्वारा इस संबंध में राज्य सरकार को प्रतिवेदन भी दिया गया है|

इस बीच कांग्रेस के अहम अभियान भारत जोड़ो को राज्य कर्मचारियों की ओर से समर्थन की तस्वीर सामने आ रही है| साथियों, दरअसल कांग्रेस ने गुजरात में पुरानी पेंशन योजना को लागू करने के लिए सकारात्मक रुख अपनाने की चुनौती दी है। ऐसे में इसका असर हमारे राज्य में भी पड़ रहा है और ऐसी तस्वीर है कि, कर्मचारी राहुल गांधी का समर्थन कर रहे हैं|

इसी के चलते जानकार लोग कह रहे हैं कि, राज्य सरकार कर्मचारी आंदोलन से पहले कर्मचारियों का असंतोष दूर करने के लिए कुछ सकारात्मक फैसला ले सकती है| इस बीच, महाराष्ट्र राज्य राजपत्रित महासंघ ने चेतावनी दी है कि, यदि राज्य सरकार 15 नवंबर तक कर्मचारियों की लंबित मांगों को हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो 15 नवंबर से पहले इस मुद्दे पर राज्य मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई जा सकती है।

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