Cotton Farming : भारत में कपास की खेती (Cotton Cultivation) साल भर की जाती है। हमारे राज्य में किसान (Farmer) भी कपास की खेती कर रहे हैं। कपास की खेती राज्य के खानदेश पश्चिम महाराष्ट्र विदर्भ मराठवाड़ा क्षेत्र में देखी जा सकती है। इस समय राज्य में हर जगह बारिश (Rain) हो रही है। इससे खरीफ सीजन (Kharif Season) की सभी फसलें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

तस्वीर से पता चलता है कि,लगातार बारिश से कपास की फसल को अधिक नुकसान हो रहा है। लगातार हो रही बारिश से कपास की फसल (Cotton Crop) के खेतों में पानी जमा हो रहा है, जिससे कपास की फसल को पोषक तत्वों की कमी महसूस होने लगी है। दोस्तों, दरअसल कपास से बाजार में सोने जैसा भाव आने की उम्मीद है क्योंकि विशेषज्ञों का दावा है कि, इस साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपास के उत्पादन में गिरावट आएगी।

पिछले साल भी कपास को बाजार भाव (Cotton Rate) अच्छा मिला था। साथ ही ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि कपास को इस साल भी बाजार में अच्छी कीमत मिलेगी। लेकिन अब लगातार हो रही बारिश से कपास की फसल (Cotton Pest) पर तरह-तरह की बीमारियां देखने को मिल रही हैं। लगातार बारिश से कपास की फसल में अब अचानक मौत देखने को मिल रही है।

ऐसे में कपास की फसल का प्रबंधन (Cotton Crop Management)  समय पर नहीं किया गया तो कपास उत्पादक किसान (Cotton Grower Farmer) को उत्पादन में कमी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कपास का बाजार भाव किसानों के काम नहीं आएगा। इसी के चलते आज हम यह जानने की कोशिश करने जा रहे हैं कि कपास की फसल पर अचानक लगने वाली बीमारी को कैसे नियंत्रित किया जाए।

कपास झुलसा के लक्षण क्या हैं?

जानकारों के अनुसार कपास की फसल की अचानक मृत्यु रोग से शुरू में कपास का पौधा मर जाता है, पौधा अचानक मुरझाकर पीला हो जाता है। इसके अलावा कपास के पौधे की पत्तियाँ, फूल और साथ ही अपरिपक्व प्रकोष्ठ सूख कर झड़ जाते हैं।

यदि अचानक मृत्यु रोग की घटना बढ़ जाती है, तो कपास का पौधा अंततः सूख जाता है और अंत में पेड़ गिर जाता है। ऐसे में जानकार लोगों का अनुमान है कि,इस बीमारी से उत्पादन में भारी कमी आएगी। इससे जानकार समय रहते इस बीमारी पर काबू पाने की सलाह दे रहे हैं।

कॉटन ब्लाइट रोग को कैसे नियंत्रित करें?

लगातार हो रही बारिश के कारण जानकारों द्वारा कपास किसानों को कपास के खेत में जमा पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी जा रही है| साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि पानी खेत में पेड़ के पास ज्यादा देर तक जमा न हो।

दोस्तों, विशेषज्ञों का दावा है कि प्रभावित पेड़ के आसपास की मिट्टी को तुरंत खरपतवारों से ढँक देना चाहिए और प्रति पेड़ 2 से 3 ग्राम यूरिया को पेड़ के पास की मिट्टी में मिला देना चाहिए, जिससे इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।

यदि मिट्टी के माध्यम से यूरिया देना संभव न हो तो पेड़ की जड़ के पास यूरिया 1.5 किग्रा + म्यूरेट 1.5 किग्रा + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 250 ग्राम 100 लीटर पानी में डालने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा कपास किसान अपने दोनों पंजों के बीच में पेड़ को पकड़कर पेड़ के तने के पास की मिट्टी को दबा दें। जानकारों का मानना है कि,इससे मौत पर भी काबू पाया जा सकता है।

दोस्तों, यहां दी गई जानकारी किसी भी हाल में अंतिम नहीं होगी। किसी भी प्रकार की दवा और छिड़काव से पहले विशेषज्ञ लोगों से सलाह लेना और कृषि सेवा केंद्र संचालक से सलाह लेना जरूरी होगा।

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