Kapus Bajarbhav : पिछले कई वर्षों से प्रकृति की मार से किसानों को नुकसान हो रहा है| कभी बेमौसम बारिश, कभी भारी बारिश, कभी सूखा और कभी वापसी की बारिश ने बलीराजा को सचमुच पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है।

एक ओर कुदरत का कुचक्र किसानों की जड़ पर चढ़ गया है तो दूसरी ओर सुल्तानों का जुल्म किसानों को जिंदा नहीं रहने दे रहा है। किसी तरह किसान प्रकृति की मर्जी से कृषि उत्पादों का उत्पादन करते हैं लेकिन मेहनत से उत्पादित कृषि उत्पादों को बाजार में बहुत अधिक कीमत मिलती है।

अतः चित्र यह है कि बलीराजा पुरता संकट में है। इस वर्ष भी अनियमित वर्षा के कारण खरीफ का मौसम किसानों द्वारा पूरी तरह से बर्बाद कर दिया गया है। खरीफ सीजन की शुरुआत में भारी बारिश के साथ-साथ फसल कटाई के समय वापसी बारिश ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

इस बीच, इस संकट से बलीराजा ने अपनी फसल को रोक लिया है और उत्पादन को थोड़ा कम कर दिया है। लेकिन अब एक तस्वीर है कि बलीराजा द्वारा बचाई गई कृषि संपत्ति की काफी ऊंची कीमत मिल रही है।खरीफ सीजन की प्रमुख फसल कपास को भी दो सप्ताह पहले बहुत कम बाजार मूल्य मिल रहा था। लेकिन अब पिछले कुछ दिनों से स्थिति बदल रही है।

कपास की कीमत बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की गांठों की अच्छी कीमत मिलने से देश में कपास के बाजार भाव में तेजी आई है। जानकारों के अनुसार जब से तिलहन खली बाजार में महंगी हुई है, तब से सरकी खली की अभूतपूर्व ऐतिहासिक मांग देखने को मिली है।

कपास की कीमतों में तेजी की यह भी अहम भूमिका है। वर्तमान में गांव में खरीदी में कपास को अधिकतम नौ हजार नौ सौ रुपए प्रति क्विंटल तक की दर से मिलना शुरू हो गया है। बाजार समिति कपास के लिए अधिकतम बाजार मूल्य 9300 रुपये प्रति क्विंटल भी निर्दिष्ट कर रही है। इससे अगले कुछ दिनों में कपास को 12 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक रेट मिलने की बात विशेषज्ञ बता रहे हैं।

इससे यह चर्चा होने लगी है कि कपास के किसान मालामाल हो जाएंगे। किसान भाइयों के अनुसार कपास का ऐतिहासिक बाजार मूल्य मिलने पर भी पुष्पक किसानों के लिए लाभदायक नहीं होगा। किसानों के मुताबिक इस साल बेमौसम बारिश के कारण कपास के उत्पादन में भारी गिरावट आई है।

इस वर्ष दस से बारह क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त करने वाले कपास का आधा उत्पादन प्राप्त हो सकेगा। तो बढ़े रेट से नुकसान की भरपाई कब होगी, लेकिन किसानों का कहना है कि इससे फायदा नहीं होगा। बढ़ी हुई दर से किसानों को लाभ नहीं हुआ तो भी यह तय है कि नुकसान की भरपाई हो जाएगी और कुछ पैसा खेत में ही रह जाएगा। इससे किसान भाई अपने जीवन रथ को स्वाभिमान से चला सकेंगे।

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