Cauliflower Farming : भारतीय खेती (Farming) में समय के साथ एक बड़ा बदलाव आया है। हमारे देश में किसान (Farmer) अब पहले से ज्यादा जागरूक हैं और कृषि में प्रयोग के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इस नए प्रयोग से किसानों को अच्छी आमदनी (Farmer Income) भी हो रही है। इसलिए पारंपरिक सब्जियों (Vegetable Crop) के साथ-साथ उन्होंने कुछ ऐसी सब्जियां उगाना शुरू कर दिया है जो सामान्य सब्जियों से अलग होती हैं।

दोस्तों, ऐसी ही एक सब्जी की फसल में कलर फूलगोभी (Colour Cauliflower) भी शामिल है। फूलगोभी तो आप सभी ने तो खाई ही होगी, लेकिन क्या आपने कभी बाजार में पीली और बैंगनी रंग की फूलगोभी खाई या देखी है? हो सकता है कि ,कुछ लोगों ने बाजार में रंग-बिरंगी फूलगोभी देखी हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ,किसानों को अधिक लाभ देने के साथ-साथ यह हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है।

फूलगोभी की विभिन्न किस्में हैं और साथ ही कई रंग भी हैं। खास बात यह है, कि इनमें कोई कृत्रिम रंग नहीं मिलाया गया है, ये प्राकृतिक रूप से पीले और बैंगनी रंग के होते हैं।

तो दोस्तों ,आइए जानते हैं रंग-बिरंगी फूलगोभी की खेती से जुड़ी जरूरी बातें।

पोषक तत्वों से भरपूर रंग-बिरंगी फूलगोभी –

पीली और बैंगनी रंग की फूलगोभी न सिर्फ देखने में खूबसूरत होती है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। जानकारों के मुताबिक पीली फूलगोभी में कैरोटीन नाम का तत्व पाया जाता है और बैंगनी रंग की पत्ता गोभी में एलांटिना नाम का पदार्थ होता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए उपयोगी होता है। इसके अलावा यह कैंसर से बचाव में भी उपयोगी है।

फूलगोभी में प्रोटीन भी उच्च मात्रा में होता है। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक जैसे गुण भी पाए जाते हैं। पत्ता गोभी बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद होती है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली और हड्डियों को मजबूत करने में भी मदद करता है।

रंगीन फूलगोभी की खेती (Colour Cauliflower Farming) के लिए मिट्टी और जलवायु-

आम फूलगोभी की तरह इसकी खेती के लिए ठंडी और नम जलवायु उपयुक्त होती है। पौधों की उचित वृद्धि के लिए तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। रंगीन फूलगोभी के लिए जीवाश्मों से भरपूर मिट्टी अच्छी होती है। साथ ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। मिट्टी का पीएच संतुलन 5.5 से 6.6 के बीच होना चाहिए।

रंगीन फूलगोभी कैसे लगाएं?

खेत की जुताई के बाद जमीन को पैड से समतल करें। रंगीन फूलगोभी की खेती के लिए नर्सरी तैयार करनी होती है। एक हेक्टेयर के लिए लगभग 200-250 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। नर्सरी में बीज रोपने के बाद जब पौधे 4-5 सप्ताह के हो जाएं तो उन्हें खेत में रोपना चाहिए। पौधे को 60*60 या 60*45 सेमी की दूरी पर लगाएं। रोपण के बाद थोड़ा पानी दें। फूलगोभी लगाने का सबसे अच्छा समय सितंबर से अक्टूबर है।

रंगीन फूलगोभी की फसल में उर्वरक एवं जल प्रबंधन-

रंगीन फूलगोभी के अच्छे उत्पादन के लिए पर्याप्त उर्वरक आवश्यक है। गोबर की सड़ी हुई खाद को मिट्टी में मिलाना चाहिए और मिट्टी की जांच के बाद आवश्यकतानुसार रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए।

मृदा परीक्षण न होने पर 120 किग्रा0 नाइट्रोजन, 60 किग्रा0 फास्फोरस एवं 40 किग्रा पलाश प्रति हेक्टेयर डालें। रोपण से 15 दिन पहले मिट्टी में गोबर और खाद डालें। पौधे की वृद्धि के लिए 10-15 दिनों के अंतराल पर पानी देना भी आवश्यक है।

रंगीन फूलगोभी की फसल को कितने दिनों में तैयार किया जाता है?

फूलगोभी की फसल बोने के 100-110 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है। एक हेक्टेयर से औसतन 200-300 क्विंटल गोभी की उपज प्राप्त होती है। रंग-बिरंगी फूलगोभी का बाजार में बेहतर दाम मिलता है, जिससे किसानों को ज्यादा फायदा होता है।

रंगीन फूलगोभी की खेती की आय (income) और लागत निम्नलिखित है (200 वर्ग मीटर क्षेत्र में)

उत्पादन लागत: 2500 रु

पौधे से पौधे और पंक्ति से पंक्ति की दूरी = 60×60 सेमी (555 पौधे)

फूलगोभी का औसत वजन = 850 ग्राम

औसत उत्पादन = 471.75 किग्रा

विक्रय मूल्य = रु.25 प्रति किग्रा

सकल आय = रु. 11793.75

शुद्ध आय = रु। 9293.75

ऐसे में रंगीन फूलगोभी की व्यावसायिक स्तर पर खेती कर किसान आसानी से लाखों रुपये कमा सकेंगे।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *