भारत एक कृषि प्रधान देश है और कृषि का विकास बहुत महत्वपूर्ण है। कृषि के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है, इसलिए सरकार का ध्यान भी कृषि क्षेत्र पर है।

कृषि क्षेत्र पर विचार करें तो कृषि क्षेत्र के विकास में विभिन्न प्रकार के कृषि अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान (contribution) है।

कृषि विश्वविद्यालय कृषि से संबंधित विभिन्न शोधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो किसानों के हित में हैं। विभिन्न फसलों की उन्नत किस्मों के अनुसंधान एवं विकास की दृष्टि से कृषि विश्वविद्यालयों का कार्य प्रशंसनीय है।

डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय में उत्पादित मिर्च और भिंडी की किस्मों को केंद्रीय समिति द्वारा अधिसूचित किया गया है और इन दो किस्मों अर्थात् भिंडी की पीडीकेवी प्रगति और मिर्च की पीडीकेवी हिरकनी को वाणिज्यिक बीज उत्पादन के लिए भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित किया गया है और इन दोनों किस्मों को जारी किया गया है। खरीफ मौसम में खेती के लिए अनुशंसित।।

इस नस्ल की विशेषताएं –

1- पीडीकेवी प्रगति – यह भिंडी की एक किस्म है और किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस किस्म की भिंडी आकार में मध्यम और आकर्षक हरे रंग की होती है।

इस किस्म की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि, यह किस्म वायरल केवड़ा रोग के लिए मध्यम प्रतिरोधी है और इसकी उच्च उत्पादन क्षमता 150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है।

2- PDKV हीरकनी (मिर्च) – यह मिर्च की एक किस्म है और मिर्च की यह किस्म अपरिपक्व होने पर गहरे हरे रंग की और परिपक्व होने पर गहरे लाल रंग की होती है।

यह विभिन्न कीटों और रोगों के लिए मध्यम प्रतिरोधी है और इस किस्म की उत्पादकता 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

लाल मिर्च की उत्पादकता 25 से 30 क्विंटल हेक्टेयर है। इस किस्म से मध्यम तीखापन, मध्यम तीखापन और अच्छे रंग का मिर्च पाउडर प्राप्त होता है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *