सब्जियों की फसलों की बात करें तो महाराष्ट्र में बैंगन की खेती व्यापक रूप से की जाती है। यह एक बारहमासी सब्जी की फसल है जिसकी बाजार में अच्छी मांग है और यह किसानों के लिए बहुत लाभदायक फसल है।

यदि हम समग्र रूप से अपनी जलवायु पर विचार करें तो महाराष्ट्र की जलवायु बैंगन की फसल के लिए अनुकूल है और महाराष्ट्र में तीनों मौसमों में बैंगन का अच्छा उत्पादन होता है। यानी खरीफ सीजन के लिए यदि रोपण करना है तो नर्सरी की तैयारी जून के दूसरे सप्ताह में कर लेनी चाहिए और फिर जुलाई और अगस्त में फिर से रोपाई करनी चाहिए|

यदि रोपण सर्दी या रबी मौसम में किया जाना है, तो नर्सरी सितंबर के अंत तक तैयार की जाती है और अक्टूबर नवंबर में दोबारा रोपण किया जाता है। बैंगन अच्छी जल निकासी वाली मध्यम और काली मिट्टी में अच्छी तरह से बढ़ता है।

बैगन की फसल में इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए

भूमि की पूर्व-जुताई के दौरान भूमि की स्थिति के अनुसार सभी खरपतवारों को हटा देना चाहिए। हल्की मिट्टी की दशा में 75 गुणा 75 सें.मी. 90 गुणा 90 सैं.मी. रखना चाहिए यदि उच्च उपज वाली या संकर प्रजातियाँ रोपनी हों।

मान लीजिए, यदि आप जो जमीन लगा रहे हैं वह मध्यम या काली है और यदि बैंगन की किस्म कम बढ़ रही है तो ऐसी किस्मों के लिए 90 गुणा 75 सेमी और ऐसी किस्मों के लिए 100 गुणा 590 सेमी की दूरी रखना फायदेमंद है यदि किस्म अधिक है बढ़ रही है।

लंबी किस्मों के लिए 400 से 500 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है और 120 से 150 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर लंबी या संकर किस्मों के लिए पर्याप्त होता है। नर्सरी के लिए बीज बोने से पहले तीन ग्राम थीरम प्रति किलो बीज को मलना चाहिए।

उर्वरक प्रबंधन में यदि भूमि काली हो तो एक हेक्टेयर में 150 किग्रा नाइट्रोजन एवं 50 किग्रा फास्फोरस एवं पलाश देना चाहिए। लेकिन इसमें नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई के समय देना आवश्यक है और शेष राशि को रोपण के बाद तीन बराबर भागों में बांट देना चाहिए। लेकिन पलाश और फास्फोरस की मात्रा पूरी देनी चाहिए। उर्वरकों की मात्रा डालने के तुरंत बाद जल प्रबंधन करना चाहिए।

कीट प्रबंधन के लिए करें ये…

बैंगन, एक सब्जी की फसल, थ्रिप्स, माइलबग्स और व्हाइटफ्लाइज़ जैसे रस चूसने वाले कीड़ों से बहुत अधिक प्रभावित होती है। दूसरे, बैंगन की फसल के लिए फली और फल छेदक भी खतरनाक है। इसलिए इन कीटों के नियंत्रण के लिए कुछ आवश्यक उपाय इस प्रकार करने चाहिए।

1- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोपण से पहले खेत की गहरी जुताई करना आवश्यक है। इन सबसे ऊपर, अगर टमाटर, मिर्च या भिंडी जैसी फसलें उगाई जाती हैं, तो ऐसी जगहों पर बैंगन लगाने से बचें।

2- नर्सरी के लिए जो भी भाप तैयार करें उसमें कार्बोफ्यूरॉन 30 ग्राम या फोरेट 10 ग्राम मिलाना चाहिए। इतना ही नहीं, पौधों को दस लीटर पानी में डाइमेथोइट 30% स्ट्रीम दस मिली या मार्शल दस मिली का छिड़काव करना चाहिए।

3- यह जरूरी है कि जब पौधे दोबारा लगाए जाएं तो पौधों को तीन घंटे के लिए दस लीटर पानी में दस मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड मिलाकर तैयार किए गए घोल में डुबोएं और फिर लगाएं।

4- रोपण के 45 दिन बाद यदि थ्रिप्स, मावा और व्हाइटफ्लाई कीड़ों का प्रकोप हो तो डाइमेथोइट 30% फ्लो दस मिली या मिथाइल डिमैटन 25% फ्लो दस मिली या स्पार्क दस मिली को दस लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।

5- बैंगन की रोपाई के दो महीने बाद यदि सड़े हुए तने और फल मिले तो उन्हें एकत्र कर नष्ट कर देना चाहिए। इतना ही नहीं, इसके लिए चार प्रतिशत निंबोली के अर्क को सायपरमेथिन 25 प्रतिशत पांच मिली को दस लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

अगर आप इस तरह से छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो बैंगन की खेती से बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है।

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