Farming Business Idea : फार्मिंग बिजनेस आइडिया: भारत में पिछले कई दशकों से बड़े पैमाने पर बाग फसलों की खेती(Farming) की जा रही है। अब हमारे देश में ड्रैगन फ्रूट जैसे विदेशी फलों की भी खेती होने लगी है। विदेशी फल फसलों से भी किसान (Farmer) अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।

एवोकैडो भी ऐसा ही एक विदेशी फल है। दुनिया में सबसे ज्यादा एवोकाडो की खेती(Avocado Farming) लैटिन अमेरिका में की जाती है। इसकी खेती अब भारत में भी देखने को मिल रही है। एवोकाडो पोषक तत्वों से भरपूर होता है।

इसमें केले से ज्यादा पोटैशियम होता है। इसलिए इसकी मांग दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। गर्म क्षेत्रों के किसान एवोकैडो(Avocado Crop) की फसल की खेती करके अच्छी आय (Farmer Income) अर्जित कर सकते हैं। क्योंकि इसकी खेती के लिए गर्म जलवायु उपयुक्त होती है।

एवोकैडो की खेती के लिए जलवायु की आवश्यकताएं

एवोकैडो एक गर्म जलवायु वाला पौधा है। एवोकैडो की खेती भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु और हरियाणा के कुछ हिस्सों, ऊपरी पंजाब में की जाती है। इसकी खेती के लिए 20-30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की आवश्यकता होती है।

एवोकैडो की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

एवोकैडो की खेती के लिए लैटेराइट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। इसके लिए मिट्टी का पीएच मान 5 से 6 के बीच होना चाहिए। इसे जलजमाव वाले खेतों में नहीं लगाना चाहिए। यदि मिट्टी जीवाश्मों से समृद्ध है, तो इस फसल से अच्छी उपज प्राप्त करना संभव है।

एवोकैडो की प्रमुख किस्में

मुख्य किस्में फुएर्टे, पिंकर्टन, हेस, पर्पल, पोलक, ग्रीन, राउंड पेराडेनिया पर्पल, हाइब्रिड, ट्रैप, लॉन्ग, फुएर्टे हैं।

खेत की तैयारी

एवोकैडो की रोपाई के लिए सबसे पहले खेत की गहरी जुताई कर निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। इसके बाद खेत में पानी डालकर मिट्टी को सिक्त करना चाहिए। नम मिट्टी में रोटावेटर लगाकर मिट्टी को चूर्णित किया जाता है।

पौधों का प्रत्यारोपण कैसे करें

5 डिग्री सेल्सियस या सूखे पीट काई में भंडारण करके बीज तैयार करें। नर्सरी में बीजों के अंकुरण के 6 महीने बाद उन्हें खेत में रोपण के लिए निकाल देना चाहिए। जुताई के बाद जमीन को समतल कर देना चाहिए। इसके बाद खेत में पौधे रोपने के लिए 90X90 सेमी आकार के गड्ढे तैयार कर लेने चाहिए। इन गड्ढों को 1:1 के अनुपात में मिट्टी में मिश्रित खाद से भरें। 8 से 10 मीटर की दूरी पर पौधे लगाएं।

सिंचाई प्रबंधन

शुष्क और गर्म मौसम में, पौधों को हर 3 से 4 सप्ताह में पानी देना चाहिए। शीत ऋतु में नमी की कमी को मल्चिंग विधि द्वारा दूर किया जा सकता है। बरसात के मौसम में जरूरत पड़ने पर ही पौधों को पानी दें। जब खेत में पानी हो तो पानी निकाल देना चाहिए। सिंचाई के लिए ड्रिप विधि का प्रयोग करें।

फलों की कटाई और उपज

एवोकैडो फल रोपण के 5 से 6 साल बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। कटाई के बाद फल नरम होते हैं, पकने में 5 से 10 दिन लगते हैं। एवोकाडो की उपज उन्नत किस्मों, खेत प्रबंधन और वृक्षों की आयु पर निर्भर करती है। एवोकाडो की गुणवत्ता के हिसाब से यह बाजार में 300 रुपये से 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है।

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