Farming Business Ideas: भारतीय कृषि (Farming) में समय के साथ बदलाव हो रहे हैं। अब कृषि में नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है और किसान (Farmer) नई नकदी फसलों (Cash Crop) के साथ-साथ बाजार में मांग में आने वाली फसलों की खेती कर रहे हैं। कृषि (Agriculture) में यह नई और उन्नत तकनीक कृषि और कृषक समुदाय के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

हाल ही में, हमारे देश में रंगीन फूलगोभी भी उगाई जा रही है। इसकी खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। कई लोगों को यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि,फूलगोभी रंगीन भी हो सकती है, लेकिन देश के कई हिस्सों में पीले और बैंगनी रंग के फूलगोभी (Colour Cauliflower Farming) की खेती की जा रही है। यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में आज हम रंगीन फूलगोभी की खेती के बारे में जानने की कोशिश करने जा रहे हैं।

मिट्टी और जलवायु-

जानकारों के अनुसार आम फूलगोभी की तरह इसकी खेती के लिए ठंडी और नम जलवायु अच्छी मानी जाती है। 20-25 डिग्री सेल्सियस का तापमान बहुत महत्वपूर्ण है। मिट्टी का pH मान 5.5 से 6.6 के बीच होना चाहिए। उचित जल निकासी वाले क्षेत्र को चुने ।

रंगीन फूलगोभी के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है। एक हेक्टेयर में 200 से 300 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। नर्सरी में बीज बोने के बाद पौधों को 4-5 सप्ताह के होने पर खेत में लगा देना चाहिए। रंग-बिरंगी फूलगोभी की खेती के लिए सितंबर से अक्टूबर का महीना सबसे अच्छा माना जाता है।

उर्वरक और सिंचाई-

अच्छी फसल उत्पादन के लिए पर्याप्त उर्वरक आवश्यक है। गाय के गोबर की सड़ी हुई खाद को मिट्टी में मिला सकते हैं। यह फसल के विकास में काफी मददगार साबित होगा। इसके अलावा मृदा परीक्षण भी किया जा सकता है। परीक्षण करें कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है। तभी उसके अनुसार बेहतर तरीके से रोपण की योजना बनाई जा सकती है।

ऐसे दिनों में कटाई के लिए तैयार-

फसल बोने के 100-110 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है। एक हेक्टेयर से औसतन 200-300 क्विंटल गोभी की उपज प्राप्त होती है। रंग-बिरंगी फूलगोभी का बाजार में बेहतर दाम मिलता है, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है।

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