Farming Business Ideas :  भारत मसाला फसलों की खेती (Spices Crops)  के लिए प्रसिद्ध है। मसाला फसलों के उत्पादन में भारत सबसे ऊपर है और मसाला फसलों की खपत भी भारत में सबसे ज्यादा है।
इसी कारण भारत को ‘मसालों का देश’ भी कहा जाता है। हमारे देश में खाना पकाने में मसालों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। ऐसे में मसाला फसलों की खेती करने वाले किसानों (Farmer) को मसाला फसलों की खेती से अच्छी आमदनी (Farmer Income) होती है।
दालचीनी  (Cinnamon Crop) की फसल भी एक प्रमुख मसाला फसल है। हमारे देश में दालचीनी की खेती (Cinnamon Farming) प्रचुर मात्रा में होती है। दालचीनी एक सदाबहार फसल है। जिसे मसाले और औषधि (Medicinal Cro) के रूप में प्रयोग किया जाता है । इसकी फसल पेड़ की सूखी छाल के रूप में प्राप्त होती है।)
इसकी पत्तियों का उपयोग तेज पत्ते के रूप में भी किया जाता है। दालचीनी एक भूरे रंग की सुगंध के साथ नरम और चिकनी होती है, जो भोजन में स्वाद जोड़ती है और विकार, दांत दर्द, सिरदर्द, त्वचा रोग, भूख न लगना और मासिक धर्म की समस्याओं को ठीक करती है। दालचीनी अपने कई गुणों के कारण हर मौसम में मांग में रहती है। इसलिए किसानों के लिए दालचीनी की खेती को अधिक लाभदायक माना गया है। ऐसे में आज हम दालचीनी की खेती के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने जा रहे हैं।

दालचीनी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और खेत –

दालचीनी एक उष्णकटिबंधीय जलवायु फसल है। दालचीनी के पौधों की वृद्धि के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे अच्छी होती है। इसके पौधों को 200 से 250 सेमी वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। बलुई दोमट मिट्टी दालचीनी की खेती के लिए उपयुक्त होती है। इसकी खेती के लिए केवल अच्छी जल निकासी वाली भूमि ही उपयुक्त होती है। दालचीनी के पौधे जून-जुलाई में लगाए जाते हैं।

दालचीनी के लिए खेत की तैयारी –

भूमि को अच्छी तरह से साफ करने के बाद 50 सेमी लंबाई और चौड़ाई के गड्ढे तैयार करने चाहिए।
गड्ढों के बीच की दूरी 3 मीटर होनी चाहिए।
जून-जुलाई में पौधे रोपने चाहिए।
अगस्त-सितंबर में पौधों की छंटाई करें।

खाद प्रबंधन-

गड्ढों को भरते समय प्रत्येक गड्ढे में 20 किलो गोबर या कम्पोस्ट डालें।

पहले वर्ष में 40 ग्राम यूरिया, 115 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 45 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पेड़ लगाना चाहिए।
गर्मी के मौसम में 25 किलो हरी खाद और 25 किलो गोबर देना चाहिए।

इसी क्रम में हर साल उर्वरक की मात्रा बढ़ानी चाहिए।

उर्वरकों का प्रयोग मई-जून तथा सितम्बर से अक्टूबर माह में करना चाहिए।

दालचीनी की किस्में –

नवश्री
नित्यश्री
दालचीनी वर्म
दालचीनी तेज पत्ता
दालचीनी

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