Farming Business Ideas : हमारे देश में पिछले कई दशकों से किसानों (Farmer) ने उत्पादन में वृद्धि के अनुरूप बड़े पैमाने पर बाग की खेती शुरू की है। महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी बड़े पैमाने पर बागों की खेती की जाती है।

चीकू भी ऐसी ही एक बाग की फसल (Sapodilla Crop) है। सपोडिला खेती रोपण  (Sapodilla Farming) के कई वर्षों बाद पैदा होती है। इसका फल स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। चीकू में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, विटामिन ए, टैनिन, ग्लूकोज जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।

तनाव, कमजोरी, बवासीर और पेट संबंधी बीमारियों में चना का सेवन फायदेमंद होता है। साथ ही इसके सेवन से कफ और पुरानी खांसी भी ठीक हो जाती है। ऐसे में बाजार में चूजों की डिमांड है। इसके अलावा चीकू की फसल (Farming) का बाजार भाव भी अच्छा मिलता है। इससे इस फसल की खेती से किसानों को अच्छी खासी आमदनी हो रही है। भारत में चने की खेती मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात में की जाती है।

चीकू की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और कृषि भूमि जानकारों के अनुसार चीकू की खेती उष्ण कटिबंधीय (Climate) जलवायु में की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि , इस फसल की खेती के लिए महाराष्ट्र की जलवायु सबसे अच्छी है। तो हमारे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर चने की खेती देखी जा सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि, महाराष्ट्र में चना उत्पादक भी अपनी फसल से अच्छी आय (income) अर्जित कर रहे हैं। चने की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। pH 5.5 और 7.5 के बीच मिट्टी वाली खेत चने की खेती के लिए उपयुक्त है।

चीकू की उन्नत किस्में (जाती) कौनसी हैं?

वास्तव में, छोले मध्य अमेरिका से उत्पन्न होते हैं। लेकिन आज यह पूरी दुनिया में फैल चुका है। भारत में भी छोले की कई उन्नत किस्में हैं। जिनमें प्रमुख उन्नत जातीया हैं जैसे कि , भूरी पत्ती, पीली पत्ती, काली पत्ती, क्रिकेट बॉल, pkm2 संकर।

चीकू बोने का सही समय-

चीकू लगाने के लिए जुलाई से सितंबर का समय सबसे अच्छा होता है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने पर मार्च में भी रोपण किया जा सकता है। रोपण से पहले गड्ढे को अच्छी तरह से तैयार करना चाहिए।

चीकू की खेती में लागत और कमाई-

हम आपको बताना चाहते हैं कि ,एक हेक्टेयर भूमि में 300 से अधिक चीकू के पेड़ लगाए जा सकते हैं। चीकू के पेड़ साल भर फल देते हैं, लेकिन मुख्य फसल नवंबर-दिसंबर में होती है। एक पेड़ से औसतन 130 किलो उपज प्राप्त होती है। 300 पेड़ लगभग 20 टन उपज देते हैं। बाजार में इसकी कीमत 50 से 70 प्रति किलो के बीच है। ऐसे में अगर किसान एक हेक्टेयर जमीन में 300 चीकू के पेड़ लगाएंगे तो एक लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं.

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