Cotton Rate:  कपास खरीफ मौसम की एक प्रमुख नकदी फसल है और राज्य के अधिकांश किसान इसी फसल पर निर्भर हैं। महाराष्ट्र में कपास की खेती उल्लेखनीय है और देश के कुल कपास उत्पादन में महाराष्ट्र का एक बड़ा हिस्सा है। दरअसल, सीजन की शुरुआत में खानदेश में कपास की कीमत 14,000 रुपये प्रति क्विंटल थी।

लेकिन सीजन शुरू होने के कुछ दिन बाद ही खानदेश में कपास की कीमतों में बड़ी गिरावट आ गई। इस बीच नवंबर की शुरुआत में कपास की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। लेकिन अब एक बार फिर कपास की कीमतों में आई तेजी फीकी पड़ गई है।

नंदुरबार कृषि उपज मंडी समिति के अंतर्गत आने वाले पलाशी स्थित कपास खरीद केंद्र में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है| इस क्रय केंद्र में कपास की कीमत कम होने से कपास की आमद कम हो गई है।पिछले सप्ताह कपास की कीमत 9000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो रही थी, लेकिन अब कपास की कीमत 9000 रुपये से नीचे आ गई है, इसलिए किसानों ने फिलहाल कपास बेचना बंद कर दिया है।

वर्तमान में पलाशी स्थित कपास क्रय केंद्र में कपास की कीमत 10 रुपये है। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी की आस में किसानों ने फिलहाल कपास बेचना बंद कर दिया है, जिससे पलाशी कपास क्रय केंद्र पर कपास की आवक काफी धीमी हो गई है|पलाशी कपास क्रय केंद्र में इस सीजन में अब तक आठ हजार क्विंटल कपास की खरीद हो चुकी है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास और रेशम के बाजार भाव में गिरावट आई है। इसके अलावा, कपास की गांठों की कम मांग के कारण कपास की कीमतों में गिरावट आ रही है।

घरेलू बाजार पर विचार करें तो कहा जाता है कि महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र से कपास की अधिक मांग है। इसके अतिरिक्त, आंध्र प्रदेश और गुजरात के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों से कपास की मांग है। लेकिन जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में जब राष्ट्रीय बाजार में कपास की मांग बढ़ेगी तो संभावना है कि देश के सभी प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में कपास के दाम बढ़ेंगे।

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