Kusum Solar Pump Yojana : महाराष्ट्र के किसानों के लिए एक बहुत ही खुशी और काम की खबर आई है। अब यहाँ महाराष्ट्र में खुली श्रेणी के किसानों को सौर पंपों के वितरण के संबंध में एक नवीनतम अद्यतन है।

कुसुम सोलर पंप योजना के तहत ओपन कैटेगरी के जिन किसानों ने सोलर पंप के लिए आवेदन किया है और अपना योगदान दे दिया है, उन्हें जल्द ही सोलर पंप मिल जाएगा। क्योंकि ऐसे ओपन कैटेगरी के किसानों को सोलर पंप बांटने के लिए आवश्यक धनराशि का वितरण कर दिया गया है।

इस संबंध में सरकार का एक अहम फैसला भी जारी किया गया है। महाराष्ट्र में कई किसानों ने अपने खेतों में सोलर कृषि पंप लगाने के लिए आवेदन किया था। किसानों ने अपने हिस्से का भुगतान किया था। लेकिन राशि के अभाव में किसानों को सोलर पंप वितरित नहीं किए गए। लेकिन अब सरकार द्वारा ओपन कैटेगरी में आवेदन करने वाले किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने के लिए राशि का वितरण कर दिया गया है और इस संबंध में एक महत्वपूर्ण सरकारी फैसला जारी कर दिया गया है।

सौर कृषि पंपों को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत 46,997 किसानों ने ट्रांसमिशनलेस सोलर कृषि पंप लेने के लिए आवेदन किया है। दिलचस्प बात यह है कि इन किसानों ने सौर कृषि पंपों के लिए अपना योगदान भी दिया है। जो सामान्य वर्ग यानी ओपन कैटेगरी के किसान हैं उन्हें राज्य सरकार की बजटीय सब्सिडी में से 10 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा।

अब राज्य सरकार के बजट अनुदान के 10% में से 10% महा ऊर्जा को वितरित किया गया है। अर्थात 15 करोड़ सत्ताईस लाख चौवन हजार (15.2754) 15 करोड़ सत्ताईस लाख चौवन हजार (15.2754) स्वीकृत 1 लाख सौर कृषि पंप हेतु 10 प्रतिशत सरकारी अंशदान राशि का वितरण किया गया है।

संबंधित खबरों के लिए राज्य सरकार से सरकार का फैसला लेकर अनुमति दी गई है। केन्द्र सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, नई दिल्ली की ओर से राज्य में कृषि पंपों के बिजली कनेक्शनों को सौर ऊर्जा के माध्यम से विद्युतीकृत करने के अभियान के तहत जैसा कि उक्त सरकारी निर्णय में उल्लेखित है।

देश भर के किसानों के लिए प्रधान मंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा अवनुम उत्थान महाभियान (कुसुम) के घटक बी के तहत स्वीकृत कुल 100,000 गैर-पारेषण सौर कृषि पंपों में से, स्थापित किए जाने वाले गैर-संचारण सौर कृषि पंपों में सरकार का 10 प्रतिशत हिस्सा है। रु. 15.2754 करोड़ (पंद्रह करोड़ सत्ताईस लाख चौवन हजार मात्र) की राशि शासन द्वारा महाऊर्जा को वितरित करने हेतु स्वीकृत की जा रही है तथा उक्त धनराशि महाऊर्जा को उपलब्ध करायी जा रही है।

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