Krushi Yantrikikaran Yojana : किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा हमेशा विभिन्न योजनाएं लागू की जाती हैं। सरकार किसानों को उनकी आय बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी प्रदान करती है। कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण के उपयोग को बढ़ाने के क्रम में सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जाती है।

आज भी सरकार ने महाराष्ट्र के किसानों को दो योजनाओं के माध्यम से प्रचुर मात्रा में सब्सिडी प्रदान की है। इसमें राष्ट्रीय कृषि विकास त्वरण योजना के तहत केवल 150 करोड़ रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराई गई है। साथ ही कृषि यंत्रीकरण उप-अभियान के तहत सामान्य वर्ग के लिए केवल 59 करोड़ 21 लाख रुपये की सब्सिडी किसानों को उपलब्ध कराई गई है।

राष्ट्रीय कृषि विकास त्वरण योजना

राज्य में विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं जैसे राष्ट्रीय दलहन, तिलहन और तिलहन मिशन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत कृषि मशीनीकरण घटक के लिए कुछ राशि उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन इसके बावजूद किसानों की मांग के मुताबिक मशीनीकरण के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है|

इन मामलों को ध्यान में रखते हुए कृषि यंत्रीकरण के लिए RKVY – RAFTAR से राशि उपलब्ध कराई जाती है।अब कृषि यंत्रीकरण परियोजना को लागू करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इसी सिलसिले में आज सरकार का एक अहम फैसला जारी हुआ है। उक्त शासनादेश के अनुसार वर्ष 2022-23 में आरकेवीवाई-रफ़्तार के अंतर्गत कृषि यंत्रीकरण परियोजना को 150.00 करोड़ रुपये (सचमुच एक सौ पचास करोड़ रुपये मात्र) की निधि से क्रियान्वित करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी जा रही है।

उक्त परियोजना को कृषि यंत्रीकरण उप-अभियान के दिशा-निर्देशों के अनुसार क्रियान्वित किया जाना चाहिए। तथापि, केवल आरकेवीवाई-रफ़्तार के अंतर्गत अनुमोदित परियोजनाओं से कृषि मशीनरी और उपकरणों की खरीद के लिए सब्सिडी, इस निधि से ट्रैक्टरों की खरीद के लिए सब्सिडी स्वीकार्य नहीं होगी।

उक्त परियोजना को महाडीबीटी पोर्टल पर क्रियान्वित किया जाना चाहिए। महाडीबीटी पोर्टल पर लाभार्थी से आवेदन स्वीकार करें और ऑनलाइन साथी के माध्यम से लाभार्थियों का चयन करें। लाभार्थी चयन की वास्तविक प्रक्रिया आरकेवीवाई-रफ़्तार के अंतर्गत उपलब्ध निधियों की सीमा के भीतर निधियों की उपलब्धता के बाद की जानी चाहिए।

परियोजना के तहत उपलब्ध कराई गई मशीनों/उपकरणों की Geo tagging की जानी चाहिए। आयुक्त (कृषि) को महाडीबीटी पोर्टल से डीबीटी के माध्यम से पीएफएमएस बैंक खाते में सब्सिडी राशि का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए। रिकॉर्ड में लाभार्थी की आधार संख्या का उल्लेख किया जाना चाहिए। लाभार्थी के स्थान का उल्लेख किया जाना चाहिए।

आयुक्त (कृषि) को आरकेवीवाई – रफ़्तार से कृषि यंत्रीकरण परियोजना के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि से अंचल स्तर पर कार्यक्रम के कार्यान्वयन की प्रक्रिया निर्धारित करनी चाहिए और सभी अंचल अधिकारियों को सूचित करना चाहिए।

कृषि यंत्रीकरण उप मिशन

कृषि यंत्रीकरण मिशन के तहत 59 करोड़ 21 लाख रुपये की धनराशि वितरित करने की स्वीकृति दी गई है। इसमें केंद्र का हिस्सा 35 करोड़ 52 लाख 67 हजार और राज्य का हिस्सा 23 करोड़ 68 लाख 45 हजार है। दरअसल, सरकार उक्त सब्सिडी को कृषि आयुक्तालय को देने की सोच रही थी।

और आज अंतत: यह अनुदान कृषि आयुक्तालय को दिया गया है। आज शासन के निर्णय से अनुदान की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। जैसा कि सरकार के निर्णय में उल्लेखित है, इस उप-अभियान के लिए वितरित धनराशि को वार्षिक कार्य योजना में केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित मदों पर खर्च किया जाना चाहिए और सब्सिडी की राशि लाभार्थियों को महाडीबीटी प्रणाली के माध्यम से आधार से जुड़े खातों में जमा की जानी चाहिए। सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से बैंक खाता।

योजनान्तर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला, लघु एवं सीमांत कृषकों को ट्रैक्टर के मूल्य का 50% अथवा रु. 1.25 लाख जो भी कम हो और अन्य किसानों के लिए 40% या रु। 1 लाख, जो भी कम हो, को निम्नानुसार अनुदान दिया जाना चाहिए। अन्य मशीनों/उपकरणों के मामले में, केंद्र सरकार के कृषि यंत्रीकरण उप-अभियान के दिशानिर्देशों, नियमों और शर्तों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।

उक्त निधि को खर्च करते समय वह निर्धारित प्रक्रिया का पालन करेगा तथा समस्त वित्तीय कानूनों/प्रक्रियाओं/वित्तीय शक्तियों की सीमा/सी.वी.सी. सिद्धान्तों/प्रचलित शासकीय निर्णयों/नियमों/परिपत्रों/प्रावधानों के अनुसार बजट एवं कोषागार विनियमों के अनुरूप व्यय करने की कार्यवाही क्रियान्वित करने वाली एजेंसियाँ करें। किसी भी परिस्थिति में किसी भी शासकीय नियम/प्राधिकार का उल्लंघन न हो यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अंचल कार्यालय की रहेगी।

कृषि यंत्रीकरण उप मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, निदेशक (इनपुट और गुणवत्ता नियंत्रण), कृषि आयुक्तालय को केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए लक्षित कार्यान्वयन के संबंध में सभी जोनल अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी करना चाहिए। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस योजना की वित्तीय और भौतिक प्रगति की मासिक रिपोर्ट हर महीने की 5 तारीख तक केंद्र सरकार को प्रस्तुत की जानी चाहिए।

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