Business Idea: भारत में समय के साथ खेती (Farming) में बड़ा बदलाव हो रहा है। अब हमारे देश के किसान मौसम के अनुसार फलों, सब्जियों, मसालों, जड़ी-बूटियों की खेती कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि किसान (Farmer) अब इन फसलों की खेती से अच्छा लाभ कमा रहे हैं।

इनमें से कुछ सदाबहार फसलें भी हैं, जो एक बार लगाने के बाद कई सालों तक भरपूर मुनाफा देती हैं। ऐसा ही एक मसाला और औषधीय फसल जायफल (Nutmeg Crop) की फसल है। यह फसल भारत में व्यापक रूप से उगाई जाती है। इस फसल की खेती (Nutmeg Farming)से हमारे देश के किसानों को लाखों रुपये की आमदनी (Farmer Income) हो रही है।

दरअसल यह फसल इंडोनेशिया की मूल निवासी है, लेकिन भारत में इसकी खपत बहुत ज्यादा है। केरल में त्रिशूर, एर्नाकुलम, कोट्टायम और तमिलनाडु में कन्याकुमारी और तिरुनेलवेली के कुछ हिस्सों में इसकी खेती की जाती है।

हम आपको बताना चाहेंगे कि जायफल 15 से 20 फीट लंबा होता है, जिसके फल और तेल को मसाले और जड़ी-बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। एक तरह से जायफल एक नकदी फसल ही है। जिसकी खेती से किसान दशकों तक स्थायी आय अर्जित कर सकते हैं।

जायफल के लिए उपयुक्त कृषि भूमि-

अच्छी जल निकासी वाली गहरी उपजाऊ भूमि जायफल की व्यावसायिक खेती के लिए उपयुक्त होती है। इसके अलावा, जायफल के पौधे सामान्य पीएच मान वाली रेतीली दोमट या लाल लेटराइट मिट्टी में अच्छी तरह विकसित होते हैं।

जायफल की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु-

हालांकि जायफल के बागान तटीय क्षेत्रों में अच्छी तरह से विकसित होते हैं, लेकिन सामान्य तापमान वाले क्षेत्रों में भी इसकी खेती की जा सकती है। इसकी खेती के लिए सामान्य, कम ठंडा और कम गर्म तापमान सबसे उपयुक्त होता है, जिसमें आप पूर्ण फल उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इसकी खेती के लिए भारत में दो स्वदेशी किस्में विकसित की गई हैं, जिनमें IISR विश्वश्री और केरल श्री शामिल हैं।

जायफल की फसल के लिए नर्सरी-

जायफल एक सदाबहार पौधा है, जो हर मौसम में अच्छी तरह उगता है। अगर किसान जायफल की खेती करना चाहते हैं तो प्रमाणित नर्सरी से पौध खरीद कर रोपण का काम कर सकते हैं. कीटों और बीमारियों की संभावना से बचने के लिए अपनी खुद की नर्सरी शुरू करना और बीज या कलमों की मदद से पौध तैयार करना फायदेमंद होगा।

जायफल उत्पादन के लिए बीजों में यूरिया या जैविक खाद डालें।

इसके बाद जायफल के बीजों को मिट्टी से भरी पॉलीथिन में बोकर छायादार स्थान पर रख देना चाहिए।

जायफल के बीजों को अंकुरित होने और पौधे तैयार करने में 12 महीने का समय लगता है, जिसके बाद पौधे को खेत में रोप दिया जाता है।

किसान चाहें तो ग्राफ्टिंग विधि से कम समय में पौधे का उत्पादन कर सकते हैं।

जायफल की खेती-

जायफल के बीज और कलमों की सहायता से पौध तैयार करने के बाद जैविक खाद डालकर खेत तैयार करें।

इसके लिए बराबर अंतराल पर गड्ढे खोदकर उसमें नीम का भोजन, गाय का गोबर और जैविक खाद आदि मिलाया जाता है।

जायफल के पौधे को खेत में लगाने से पहले पॉलीथिन को हटा दें और जड़ों को गोमूत्र और बाविस्टिन से उपचारित करें।

जायफल के पौधे बरसात के मौसम में मौसम के आधार पर लगाने से अच्छे परिणाम मिलते हैं।

जायफल की फसल की देखभाल कैसे करें-
जाहिर सी बात है कि, जायफल एक मजबूत पौधा है, जो एक अच्छे आकार के पेड़ के रूप में विकसित होता है, इसलिए समय-समय पर पौधों को पानी देते रहें।

विशेषज्ञों के अनुसार जायफल के पेड़ों को गर्मी में 15 से 17 दिन और सर्दी में 20 से 30 दिन के अंतराल पर ड्रिप सिंचाई से पानी देना चाहिए।

शुरुआत में जायफल के पेड़ के आसपास भी खरपतवार उग आते हैं, जो पेड़ के विकास में बाधक होते हैं।

ऐसी स्थिति में 15 से 30 दिनों के अंतराल पर निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।

खरपतवार निकालने से जड़ों तक ऑक्सीजन का संचार तेज होता है और पौधे बढ़ते हैं।

वैसे जायफल को जड़ी-बूटी के साथ-साथ मसाला भी कहा जाता है, अगर इसकी ठीक से देखभाल न की जाए तो यह कीटों और बीमारियों में पनपने लगता है।

इसकी रोकथाम के लिए समय-समय पर पौधों की निगरानी करते रहें, कीट का प्रकोप दिखने पर निंबोली-गोमूत्र कीटनाशक का छिड़काव भी प्रभावी होता है।

जायफल का उत्पादन और उपज-

जायफल के पौधे रोपण के लगभग 6 से 8 वर्ष बाद फल देने लगते हैं। वहीं, अच्छी मात्रा में फल पैदा करने में करीब 18 से 20 साल का समय लगता है।

जायफल के पौधे फूल आने के 9 महीने बाद फल देने लगते हैं, जिससे आप जावित्री को अलग करके जायफल को बेच सकते हैं।

एक जायफल उत्पादक अपने पेड़ों से सालाना 500 किलोग्राम फल काट सकता है, जिसकी उपज ₹ 200,000 तक होती है।

आपको बता देना चाहते हैं कि, जावित्री जायफल के साथ-साथ बाजार में अच्छी कीमत भी प्राप्त करता है। इस तरह जायफल की बागवानी करके आप सालों तक अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

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