Farming bussiness idea : अधिकांश पशुपालन व्यवसाय मे लोग भैंस पालन करते है। हम जानते हैं कि, भारत में भैंसों की कई नस्लें हैं। लेकिन दुग्ध व्यवसाय के लिए सही प्रकार की भैंस का चुनाव करना बहुत जरूरी है। क्योंकि भैंस की प्रत्येक नस्ल के शरीर की विशेषताएं और गुण अलग-अलग होते हैं और दूध देने की क्षमता भी अलग होती है।

इसलिए अधिक दूध देने वाली नस्ल का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। लेकिन इन सभी नस्लों में से अगर भैंस की नागपुरी (Nagpuri) नस्ल को भैंस पालन के लिए चुना जाता है, तो इसमें दुग्ध उत्पादकों को भरपूर दूध उत्पादन देने की क्षमता होती है। उस लेख में हम इस भैंस के बारे में जानेंगे।
नागपुरी भैंस दुग्ध व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण है।

इसकी सबसे खास बात यह है कि, नागपुरी भैंस को इलिचपुरी या बरारी के नाम से भी जाना जाता है। यह नस्ल महाराष्ट्र के नागपुर, अकोला और अमरावती में पाई जाती है। यह उत्तर भारत और एशिया के कई हिस्सों में भी पाया जाता है।

सात सौ से बारह सौ लीटर दूध उत्पादन क्षमता –

नागपुरी भैंस के दूध में 7.7 प्रतिशत वसा होता है, जबकि गाय के दूध में 3.4 प्रतिशत फॅट होता है। यदि नागपुरी भैंसों से अच्छा दूध उत्पादन चाहा जाए तो इन भैंसों को मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, जई, शलजम और कसावा के साथ घास और भूसा खिलाया जाता है।

अगर कोई नागपुरी भैंस की पहचान करना चाहता है, तो उसे एक नज़र में पहचानना संभव है। यह भैंस अन्य भैंसों से अलग है क्योंकि यह बहुत बड़ी होती है और इसमें तलवार के समान सींग होते हैं। साथ ही इस भैंस की गर्दन भी काफी लंबी होती है।

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