साड़ी दुनिया भारत को विश्व का सबसे बड़ा मार्केट समझती है। भारत अब बस मार्केट नहीं बने रहना चाहता है।

अब देश दुनिया का इंडस्ट्रियल हब बनने जा रहा है। पिछले कुछ सालों से देश में कई बड़ी विदेशी कंपनिया निवेश कर रही है।

इसी बिच खबर है कि , भारत जल्द ही विश्व का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक हब बनने जा रहा है। केंद्र सरकार ने भारत को इलेक्ट्रॉनिक हब बनाने के लिए एक कदम आगे रखा है। कैबिनेट ने सेमी कंडक्टर्स बनाने के लिए एक 76000 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।

क्या है नई परियोजना ? केंद्र सरकार की इस परियोजना के तहत अगले 6 वर्षों में 20 मैन्युफैक्चरिंग हब्स बनाए जाएंगे।

इन यूनिट्स में सेमीकंडक्टर डिजाइन, सेमीकंडक्टर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री का उत्पादन, डिस्प्ले फैब्रिकेशन इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

दुनिया भर में सेमीकंडक्टर की कमी के कारण इंडस्ट्री में उत्पादन की कमी है। इस वजह से सरकार ने यह तगड़ा कदम उठाया है।

दुनिया भर में सेमीकंडक्टर का अकाल कई मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक चिप्स और सेमीकंडक्टर की कमी जून 2022 तक जारी रह सकती है।

कोरोना काल में चिप्स और सेमीकंडक्टर का उत्पादन भी काफी कम मात्रा में हुआ था। इन दोनों चीजों का इस्तेमाल कारों के उत्पादन में होता है।

इसके चलते कारों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। चिप्स और सेमीकंडक्टर का उपयोग न केवल कारों में बल्कि स्मार्टफोन, लैपटॉप, टेलीविजन और रेफ्रिजरेटर में भी किया जाता है।

इसका मतलब है कि चिप्स की कमी का असर इन सभी उत्पादों पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार के इस निर्णय से दुनिया की नज़रे भारत पर तिकी हुई है।

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