Wheat Farming : रबी मौसम (Rabi Season) की प्रमुख नकदी फसलों में गेहूँ सबसे पहले आता है। भारत गेहूँ का प्रमुख उत्पादक और निर्यातक है। यह देश और दुनिया में गेहूं की खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करता है।

देश के अधिकांश हिस्सों में रबी मौसम के लिए खरीफ चावल और मक्का, सोयाबीन की फसल के बाद गेहूं बोने की प्रथा है।

हमारे महाराष्ट्र में गेहूं की खेती की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे कई राज्यों में इसकी बुवाई की तैयारी भी कर ली गई है| अब भारतीय वैज्ञानिकों ने भी किसानों के लिए गेहूं की एक उन्नत किस्म विकसित की है।

आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने गेहूं की एक अद्भुत किस्म की खोज की है। हम आपको सूचित करना चाहेंगे कि, इस उन्नत किस्म को सूखा प्रतिरोधी और गर्मी सहनशील प्रजातियों में गिना जाता है। तो आइए इसके उत्पाद और गुणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

आईआईटी कानपुर द्वारा गेहूं की एक नई उन्नत किस्म विकसित की गई है|

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IIT कानपुर इनक्यूबेटेड कंपनी LCB Fertilizer ने एक उन्नत गेहूं बीज विकसित किया है, जिसे नैनो कोटेड पार्टिकल सीड भी कहा जाता है। इस बीज को विकसित करने वाले एलसीबी शोधकर्ताओं के मुताबिक गेहूं की इस किस्म पर चल रहे शोध में सफलता मिली है। बीज नैनो कणों और सुपर शोषक पॉलिमर के साथ लेपित है।

जानकारों के मुताबिक गेहूं के इन बीजों पर पॉलीमर होता है, जो 268 गुना पानी सोखने की क्षमता रखता है। इस बीज के पानी की गुणवत्ता के कारण, फसल को 35 दिनों तक पानी देने की आवश्यकता नहीं होगी।

रिपोर्टों के अनुसार, यह नवीनतम विकसित गेहूं का बीज 78 डिग्री तापमान पर भी जीवित रह सकता है। यह फसल 120 से 150 दिनों में पककर तैयार हो जाएगी। 35 दिनों तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होत|

आधुनिकता के दौर में अब किसान कम मेहनत में बेहतर उपज देने वाली किस्मों पर भी ध्यान दे रहे हैं। साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को झेल सकने वाली किस्मों की मांग भी बढ़ गई है।

गेहूं की फसल को समय पर पानी और कटाई की जरूरत होती है, क्योंकि पानी और गर्मी की कमी से फसल जल जाती है और नष्ट हो जाती है, लेकिन अब आईआईटी विशेषज्ञों ने एक ऐसी किस्म विकसित की है, जो गेहूं की खेती से जुड़ी सभी चिंताओं को कवर करेगी।

हम आपको बताना चाहेंगे कि, गेहूं की यह नवीनतम विकसित किस्म बिना सिंचाई के 35 दिनों तक भी अच्छी उपज देती है, जो पानी की कमी वाले क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इस किस्म की खेती से उत्तर भारत के किसान लाभान्वित हो सकते हैं।

क्या कहते हो! गर्मी का कोई असर नहीं होगा|

जो किसान अक्सर मौसम में देर से गेहूं बोते हैं, उन्हें गर्मी के कारण फसल के नुकसान का डर होता है, लेकिन इस चिंता को आईआईटी कानपुर की एक कंपनी एलसीबी फर्टिलाइजर द्वारा विकसित किस्म के रोपण से कम किया जा सकता है।

गेहूं की यह उन्नत किस्म अब कम सिंचाई में बेहतर उपज देगी, इसलिए गर्मी और गर्मी से फसल के सूखने और झुलसने का खतरा भी नहीं रहेगा। इससे किसानों की काफी चिंता दूर होगी और कृषि में सिंचाई प्रबंधन पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा। इस प्रकार गेहूं की खेती की लागत कम होगी और लाभ बढ़ेगा।

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