Sugarcane Farming : देश में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। गन्ना किसानों के लिए प्रमुख नकदी फसलों में से एक है। हमारे राज्य के किसान भी नकदी फसल के रूप में गन्ने पर निर्भर हैं। पिछले सीजन में रिकॉर्ड पर गन्ना बोया गया था।

यही वजह थी कि पिछले सीजन में सबसे ज्यादा चीनी उत्पादन महाराष्ट्र में लिया गया था। अब महाराष्ट्र चीनी उत्पादन के मामले में देश का नंबर एक राज्य बन गया है। इसकी खेती से किसानों को दोगुना लाभ हो रहा है, क्योंकि यह देश में चीनी का एकमात्र मुख्य स्रोत है।

इस कारण से किसान गन्ने के मौसम (अक्टूबर-नवंबर) के दौरान सबसे अधिक गन्ना लगाते हैं। चूंकि गन्ने को एक स्थायी उपज देने वाली फसल के रूप में जाना जाता है, हमारे राज्य में गन्ने की खेती का क्षेत्रफल भी दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। अगर आप भी अपने खेत से अच्छा मुनाफा कमाने के लिए गन्ने की खेती करने की सोच रहे हैं तो यह लेख खास आपके लिए बनाया गया है।

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बताना चाहेंगे कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। एक रिपोर्ट बताती है कि अकेले भारत में गन्ने की फसल की अनुमानित उत्पादकता 77.6 टन प्रति हेक्टेयर है और उत्पादन क्षमता लगभग 306 मिलियन टन है।

लगभग हर किसान गन्ने की खेती करता है, लेकिन जो किसान अच्छी और उन्नत तकनीक से गन्ने की खेती करता है, उसे अच्छा मुनाफा होता है। आप भी उन्नत गन्ना पद्धति का प्रयोग कर अपने खेत में गन्ना बोकर दोहरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

ट्रेंच तकनीक से गन्ना बोया जाए तो उत्पादन में 30 प्रतिशत की वृद्धि होगी|

गन्ने की फसल से अधिक लाभ प्राप्त करना हो तो ट्रेंच तकनीक अपनाकर 30 प्रतिशत से अधिक गन्ने की उपज प्राप्त की जा सकती है। इस तरीके के लिए आपको ज्यादा कुछ करने की भी जरूरत नहीं है।

यह एक पारंपरिक तरीका है, जिसमें बहुत कम पानी का इस्तेमाल होता है।

इस विधि से गन्ने में खरपतवार कम होते हैं तथा उर्वरकों का समुचित प्रयोग होता है।

इसमें खेत में गन्ना बोने के लिए करीब 1 फुट गहरा और 1 फुट चौड़ा नाला बनाना होता है।

उसके बाद इन नालों में 2 से 3 आंखों वाली न्यूनतम लंबाई 25 सेंटीमीटर की गन्ने की बेल लगाई गई।

इस विधि में गन्ने से गन्ने की दूरी 10 सेमी तथा नालियों की दूरी 4 फुट तक होनी चाहिए।

इस पद्धति की सबसे अच्छी विशेषता यह है कि आप एक ही समय में दो फसलों की कटाई कर सकते हैं। किसान गन्ने के साथ अन्य दलहनों के साथ अंतरफसली लगा सकते हैं। ऐसा करने से किसान का मुनाफा दोगुना होगा और खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।

गन्ने की खेती की ट्रेंच तकनीक में आवश्यक खाद की मात्रा

यदि आप अपने खेत में खाइयों में गन्ने की खेती कर रहे हैं तो आपको एक एकड़ भूमि के लिए लगभग 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 30 किलोग्राम फॉस्फोरस और 25 किलोग्राम पोटाश देना चाहिए। याद रखें कि बुवाई के समय आपको फसल में नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा मिलानी है। जिससे फसल अच्छे से तैयार हो सके। इससे गन्ना उत्पादन में भारी वृद्धि होती है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *