Buldhana News : फसल बीमा कंपनियां इस समय किसानों को मुआवजा दे रही हैं। लेकिन मुआवजा देते समय फसल बीमा कंपनियों की मनमानी की पोल खुल रही है।

हालांकि फसल बीमा लेने वाले किसानों को संबंधित कंपनियों से 30 से 40 रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। हालांकि, बुलढाणा जिले के खामगांव तालुक के मौजे अकोली के एक किसान को 19 रुपये का फसल बीमा मुआवजा मिला है| तो किसान भाइयों को सिर्फ 19 रुपये का नुकसान हुआ था? कंपनी ने गुस्से में जवाब दिया है कि आपको लोगों पर नहीं बल्कि अपने दिमाग पर शर्म आनी चाहिए।

अकोली के किसान तेजराव शामराव पटोडे को फसल बीमा कंपनी से महज 19 रुपये का मुआवजा मिला है। तेजराव के पास कुल 25 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से उन्होंने 22 एकड़ कृषि भूमि का फसल बीमा कराया है। उन्होंने बीमा पर 10,000 रुपये खर्च किए थे और उन्हें 12,000 रुपये का मुआवजा मिला था।

तेजराव के मुताबिक, उन्होंने उदीद मूंग की एक हेक्टेयर फसल का बीमा कराने के लिए 740 रुपये खर्च किए, लेकिन मुआवजे के रूप में उन्हें केवल 19 रुपये ही मिले। उन्होंने अपनी पांच एकड़ सोयाबीन की फसल का बीमा भी कराया था, जिसके लिए उन्हें मुआवजे के तौर पर कम से कम 25 से 30 हजार रुपये मिलने थे, लेकिन इसके लिए उनके खाते में फसल बीमा प्रीमियम से भी कम राशि जमा की गई है|

साथ ही कालेगांव के एक किसान को भी बहुत कम नुकसान हुआ है। इस किसान का नाम गोपाल रामेश्वर रहाणे है और उन्हें 2819 रुपये का फसल बीमा लेने पर मुआवजे के तौर पर 1147 रुपये का फसल बीमा मिला है|

इस बीच तालुका के कृषि अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से बात की है| साथ ही बीमा प्रतिनिधियों ने कहा है कि अगले कुछ दिनों में किसानों को कम बीमा क्यों मिला, इसकी जानकारी दी जाएगी।

कुल मिलाकर भारी बारिश से बेहाल किसानों का बीमा कंपनियों द्वारा मजाक उड़ाया जा रहा है। बीमा कंपनियों की इस मनमानी से अब किसानों की ओर से रोष व्यक्त किया जा रहा है। इसलिए यह बड़ा सवाल भी उठ रहा है कि यह फसल बीमा किसानों का है या कंपनियों का।

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