Farming Business Idea: खेती के बिजनेस में किसानों को समय के साथ बदलते रहना बहुत जरूरी है| दिलचस्प बात यह है कि समय के साथ किसान भी बदल रहे हैं। अब किसानों ने अपना मार्च बाग की खेती की ओर कर दिया है।

ऐसे में आज हम अपने पाठकों के लिए एक ऐसे फल की खेती की जानकारी लेकर आए हैं जिसे एक बार लगाने से किसानों को 25 साल तक उत्पादन मिलेगा| दरअसल आज हम अखरोट की खेती के बारे में जानने वाले हैं। तो आइए बिना समय गवाए अखरोट की खेती के बारे में विस्तार से जानते हैं।

अखरोट की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

बहुत गर्म जलवायु वाले क्षेत्र अखरोट की खेती के लिए अच्छे नहीं होते हैं और बहुत ठंडे मौसम वाले क्षेत्र भी अच्छे नहीं होते हैं। अत्यधिक गर्मी में फल और पौधे खराब हो जाते हैं, अत्यधिक ठंड/ठंड पौधों की वृद्धि को रोक देती है। आप अखरोट को सामान्य जलवायु वाले स्थानों में उगा सकते हैं। इसकी खेती के लिए 20 से 25 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। जब अखरोट बढ़ रहे हों तो ठंडी जलवायु आदर्श होती है।

अखरोट के लिए उपयुक्त कृषि भूमि

अखरोट की खेती के लिए अच्छी जलनिकासी वाली भूमि उपयुक्त होनी चाहिए। चिकनी मिट्टी अच्छी होती है। मिट्टी ह्यूमस होनी चाहिए। रेतीली और सख्त मिट्टी अखरोट के लिए अच्छी नहीं होती है। साथ ही मिट्टी क्षारीय नहीं होनी चाहिए।

अखरोट की उन्नत किस्में

अखरोट लगाने से पहले उन्नत किस्मों का चयन करें। जो अच्छा आउटपुट देता है। अखरोट की उन्नत किस्मों में पूसा एक्रोट, पूसा खोड़, प्लेसेंटिया, विल्सन, फ्रैंकेट, प्रताप, गोविंद, कश्मीर बदीद, यूरेका, सोल्डिंग सेलेक्शन और कोटखाई सेलेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा पेपर वॉलनट की खेती पर जोर दिया जा रहा है। ये अखरोट अच्छे उपज देने वाले होते हैं।

अखरोट लगाने का सबसे अच्छा समय

आप दिसंबर से मार्च तक हल्के ठंडे मौसम में अखरोट उगा सकते हैं। इसे मानसून के दौरान भी लिया जाता है।

अखरोट की नर्सरी

अखरोट लगाने के लिए नर्सरी में पौध तैयार करने की आवश्यकता होती है। यह काम रोपण से एक साल पहले मई-जून से शुरू हो जाता है। अंकुर दो तरह से तैयार किए जाते हैं। अगर पहले बीज से पौधा बनाया जाए तो वह कई सालों बाद फल देगा। एक अन्य विधि ग्राफ्टिंग है, जिसके द्वारा सभी गुणों से युक्त उत्पादित पौधे कुछ वर्षों के बाद फल देने लगते हैं।

अखरोट का पौधा

नर्सरी में तैयार पौध को गड्ढे बनाकर खेतों में लगाया जाता है। खेत की मिट्टी समतल और ह्यूमस होनी चाहिए। खेत में दो फुट चौड़ा, एक फुट गहरा गड्ढा बना लेना चाहिए। जिसके बीच की दूरी करीब 5 मीटर होनी चाहिए। पौध रोपने से पहले गड्ढे में गोबर, रासायनिक खाद, मिट्टी डाली जाती है। इसके बाद पौधरोपण किया जाता है।

अखरोट की फसल की सिंचाई

अखरोट के पेड़ को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है। शीत ऋतु में 20 से 30 दिन के अन्तराल पर सिंचाई की जाती है। लेकिन गर्मी में हर हफ्ते पानी देना पड़ता है। पौधा विकसित होने के बाद इसके पौधे को साल में केवल 7 से 8 सिंचाई की जरूरत होती है। हालाँकि पौधे को फूल आने के लिए नमी की आवश्यकता होती है, लेकिन मिट्टी में नमी बनाए रखना आवश्यक है।

अखरोट की फसल में खरपतवार एवं रोग नियंत्रण

अखरोट के पेड़ प्रारंभिक अवस्था में रोग के प्रति संवेदनशील होते हैं। ऐसे में खरपतवारों को नियंत्रित करने और निराई करते रहने के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।

फलों की तुड़ाई कब करें

पहले अखरोट के पेड़ को फल देने में अधिक समय लगता है, लेकिन उन्नत किस्मों और नई तकनीकों के आधार पर, यह रोपण के लगभग 4 साल बाद ही फल देना शुरू कर देता है। अखरोट के फलों को तब तक तोड़ा जाना चाहिए जब तक कि ऊपरी छाल फट न जाए। कुछ फल पकने के लिए गिर जाते हैं। जब 20 प्रतिशत फल गिर जाएं तो पूरे फलों को हटा देना चाहिए।

अखरोट की खेती में कितना मुनाफा होगा

अखरोट का पेड़ लगाने के 4 साल बाद फल देने लगता है, जो अगले 25-30 सालों तक फल देता रहता है। एक पौधे से सालाना 40 से 50 किलो उपज मिलती है। अखरोट एक महंगा ड्राई फ्रूट है। अखरोट का बाजार भाव 500 से 700 रुपए किलो तक है। इस हिसाब से 20 से 25 अखरोट के पेड़ लगाकर किसान 5 से 6 लाख तक की कमाई कर सकते हैं।

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