Kanda Bajarbhav :प्याज की फसल (Onion Crop) महाराष्ट्र में उत्पादित एक प्रमुख नकदी फसल (Cash Crop) है। महाराष्ट्र में प्याज की खेती (Onion Farming) बड़े पैमाने पर की जाती है।

महाराष्ट्र में ज्यादातर किसान (Farmer) प्याज की फसल पर निर्भर हैं। लेकिन इस साल प्याज किसान अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ दिन पहले प्याज की कीमत काफी ज्यादा थी।

लेकिन अब प्याज के बाजार भाव में सुधार हुआ है| फिलहाल खुदरा बाजार में प्याज 40 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है और थोक बाजार में प्याज का बाजार भाव 25 रुपये प्रति किलो (Onion Rate) तक है। लेकिन अगले कुछ दिनों में खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 50 रुपये प्रति किलो तक जाने की संभावना थी|

लेकिन अब इस पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने प्याज को खुले बाजार में बिक्री के लिए बफर स्टॉक से हटा दिया है, यानी प्याज की कीमत को नियंत्रित करने के लिए| इससे आम आदमी को कम दाम में प्याज तो मिल ही जाएगा, लेकिन किसानों की उम्मीद पर पानी फिर जाएगा। इस बीच, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्याज और दालों की कीमतों को दिसंबर तक नियंत्रित किया जाएगा क्योंकि सरकार के पास प्याज और दालों का पर्याप्त भंडार है।

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह द्वारा मीडिया को दी गई अहम जानकारी के मुताबिक सरकार के पास ढाई लाख टन से ज्यादा प्याज का स्टॉक उपलब्ध है| इसके अलावा, सरकार ने अब राज्यों को 54 लाख टन प्याज भेजा है। दरअसल, खरीफ सीजन के दौरान पैदा होने वाले प्याज को बेमौसम और वापसी की बारिश से काफी नुकसान हुआ है| इससे उत्पादन घटने का डर बना हुआ है।

हालांकि, सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में प्याज का बफर स्टॉक है, इसलिए प्याज बाजार में कोई कमी नहीं आएगी, परिणामस्वरूप प्याज की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी। इससे निश्चित तौर पर आम आदमी को प्याज के लिए ज्यादा पैसे नहीं चुकाने होंगे बल्कि इसका असर किसानों पर भी पड़ेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मदर डेयरी, सफल, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को केंद्रीय भंडार से 800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज की आपूर्ति करने का प्रस्ताव दिया गया है।

इससे दिसंबर तक प्याज की कीमतों पर स्वाभाविक रूप से नियंत्रण रहेगा। हालांकि जानकारों का कहना है कि, इससे किसानों को बड़ा नुकसान होगा। बैरक में किसानों द्वारा रखा गया प्याज पहले ही आधा रह गया है। ऐसे में अगर प्याज की कीमत भी घटती है, तो किसानों को दोहरा फटका मिलेगा |

प्याज उत्पादक भाइयों के मुताबिक अगर वे कंडाचली में प्याज के तीन ट्रैक्टर स्टोर करते थे, तो अब उन्हें प्याज के डेढ़ ट्रैक्टर मिल रहे हैं| यानी कंडाचली में रखे प्याज का वजन कम हो गया है और काफी हद तक सड़ भी गया है| यह निश्चित रूप से प्याज किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।

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