Business Idea: भारत में कृषि एक प्रमुख व्यवसाय है। किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन भी काफी हद तक करते हैं। मवेशी और भैंस पालन सबसे आम पशुपालन है। दोस्तों, गाय भैंसों को विशेष रूप से दूध उत्पादन के लिए पाला जाता है।

इस व्यवसाय से किसानों को अच्छी आमदनी भी होती है। लेकिन समय बीतने के साथ हर व्यवसाय में बदलाव करना बहुत जरूरी है। पशुपालन करने वाले किसानों को भी समय के साथ पशुपालन व्यवसाय को बदलना होगा। केवल दूध बेचने के बजाय, दूध को संसाधित करने और फिर दुग्ध उत्पादों को बेचने से वे और अधिक लाभदायक हो जाएंगे।

ऐसे में आज हम अपने पशुपालन किसान पाठक मित्रों के लिए एक खास बिजनेस आइडिया की जानकारी लेकर आए हैं| साथियों, कोरोना के समय से ही लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। अब लोग बड़े पैमाने पर आयुर्वेदिक उत्पादों को अपने जीवन में शामिल करने लगे हैं। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधीय अर्क या औषधीय घी का व्यापक रूप से सेवन किया जा रहा है।

आज हम यह जानने जा रहे हैं कि, औषधीय घी कैसे बनाया जाता है और पशुपालकों के लिए इस व्यवसाय में कितना अवसर है। दोस्तों, इस मौके पर हम आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि, अगर पशुपालन करने वाले किसान न केवल दूध बेचते हैं बल्कि दूध को भी प्रोसेस करते हैं और घी में कुछ औषधीय पौधे मिलाकर औषधीय घी तैयार करते हैं, तो उस घी की कीमत 1000 रुपये प्रति है।

जाहिर है, 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध बेचने की तुलना में औषधीय घी को 1000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचना किसानों के लिए अधिक लाभदायक होगा। ऐसे में अब आप भी उत्सुक होंगे कि, यह औषधीय घी कैसे तैयार किया जाता है। तो आइए बिना समय गवाएं औषधीय घी निर्माण के इस व्यवसाय के बारे में विस्तार से जानते हैं।

दोस्तों, औषधीय घी काली मिर्च, पिपली, सौंफ आदि जड़ी बूटियों से बनाया जाता है। औषधीय घी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में मददगार बताया गया है। साथ ही इसके सेवन से मानव स्वास्थ्य मजबूत रहता है। ऐसे में औषधीय घी की मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इससे पशुपालन करने वाले किसानों के लिए औषधीय घी बनाने का व्यवसाय लाभदायक होगा।

दोस्तों, इस व्यवसाय पर खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग द्वारा एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस सरकारी रिपोर्ट के अनुसार औषधीय घी बनाने का व्यवसाय शुरू करने के लिए पशुपालकों को 4 लाख 80 हजार रुपये तक खर्च करने की उम्मीद है। इतना ही नहीं इस धंधे के लिए जमीन की कीमत को रिपोर्ट से बाहर कर दिया गया है।

जाहिर है, देहाती किसानों को अपनी जमीन होने पर जमीन के लिए खर्च नहीं करना पड़ता है। हालांकि, परियोजना में पशुपालकों के लिए खर्च की जाने वाली धनराशि का उल्लेख नहीं है, जिनके पास इस व्यवसाय के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है, उन्हें व्यवसाय शुरू करने से पहले जमीन उपलब्ध करानी होगी।

इस बीच, इस व्यवसाय के लिए 1,000 वर्ग फुट के शेड की आवश्यकता होती है। शेड पर 2 लाख रुपये खर्च होने की उम्मीद है। साथ ही औषधीय घी बनाने के व्यवसाय के लिए कुछ उपकरणों की आवश्यकता होगी। इनमें वॉल्यूमेट्रिक घृत भरने की मशीन, बोतल धोने आदि शामिल हैं।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि, एक मशीन की आवश्यकता है और इसकी कीमत 1,80,000 रुपये हो सकती है। यानी उक्त परियोजना रिपोर्ट में कुल पूंजीगत व्यय 3,80,000 रुपये होने का अनुमान है। साथ ही उक्त परियोजना रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि, इस व्यवसाय के लिए 1,05,000 की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता हो सकती है। यानी इस कारोबार के लिए कुल 4,85,000 रुपये की पूंजी की जरूरत होगी।

अब एक नजर डालते हैं कि, इतनी पूंजी खर्च करने पर कितना मुनाफा होता है, दोस्तों इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट की मानें तो इतना खर्च कर हर साल 30000 किलो औषधीय घी का उत्पादन होने जा रहा है| मान लीजिए यह औषधीय घी 800 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकता है तो व्यापारी को 2 करोड़ 40 लाख रुपये तक की कमाई होने वाली है। अब इससे होने वाले लाभ के बारे में सोचें तो रिपोर्ट में कहा गया है कि, 30 प्रतिशत लाभ होगा| ऐसे में इस कारोबार से सालाना सत्तर लाख का शुद्ध लाभ होगा।

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