Pune-Bangalore Greenfield Expressway : किसी भी विकसित देश के विकास में सड़कें और संचार प्रमुख भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भारत सरकार ने भारतमाला परियोजना के तहत पूरे देश में सड़क निर्माण का काम हाथ में लिया है।

इस परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के माध्यम से देश भर में तीन हजार किलोमीटर हाई-स्पीड हाईवे विकसित किए जा रहे हैं। इसमें पुणे बैंगलोर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे भी शामिल है।

कहा कि यह हाईवे महाराष्ट्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इस हाइवे से राज्य के विशिष्ट पुणे संभाग के कृषि क्षेत्र, उद्योग और पर्यटन क्षेत्र को गति मिलेगी| हम यहां आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि प्रस्तावित राजमार्ग पुणे मंडल के पुणे सांगली और सतारा जिलों से होकर गुजरेगा।

उक्त हाईवे सतारा जिले के चार तालुकों खंडाला, फलटन, कोरेगांव, खाटव में विकसित किया जाएगा। इन चार तालुकों के 60 गांवों में उक्त राजमार्ग प्रस्तावित है और अब भूमि अधिग्रहण की आवश्यक प्रक्रिया लागू की जा रही है। हाईवे के रास्ते में जगह-जगह मार्किंग स्टोन लगा दिए गए हैं।

इस बीच किसानों की ओर से हाईवे में जाने वाली जमीन के उचित मुआवजे की मांग जोर पकड़ती जा रही है| संबंधित किसानों की ओर से शेतकारी संघर्ष समिति ने सोमवार को समाहरणालय पर धरना मार्च भी निकाला।

हाईवे का काम तब तक शुरू नहीं होगा जब तक जिले में हाईवे में जमीन के मालिक हर जमींदार को वाजिब मुआवजा नहीं दिया जाता, संबंधित किसानों को आवंटन के अनुसार अवार्ड की सूचना दी जाए, संबंधित प्रभावितों को ध्यान में रखते हुए गणना की जाए|

किसानों को विश्वास में लेकर प्रभावित किसानों को गणना के चार दिन पहले लिखित रूप में सूचित किया जाए, आवंटन तय करने के लिए एक सरकारी समिति गठित की जाए ऐसी मांग की गई है| उक्त मांगें नहीं माने जाने पर समिति की ओर से उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई|

इसके अलावा संघर्ष समिति ने यह भी मांग की कि हाइवे में अपनी जमीन गंवाने वाले किसानों को रेडी रेकनर से दस गुना अधिक या प्रति एकड़ दो करोड़ मुआवजा दिया जाए| ऐसे में सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि किसानों की मांग पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया होगी, किसानों की मांगें पूरी होंगी या नहीं|

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