पिछले कुछ सालों में देश में हवाई परिवहन ने काफी तरक्की कर ली है। देशभर के लगभग सभी इलाकों में हवाई परिवहन की सुविधा पहुँच रही है। नतीजन हवाई सफर करने वाले लोगों में काफी इजाफा हुआ है।

हवाई परिवहन कंपनियों में बढ़ रहे कम्पटीशन की वजह से हवाई सफर का किराया भी काफी सस्ता हुआ है। जिस वजह से आम आदमी भी हवाई सफर करने में सक्षम हुआ है। फ़िलहाल देश का घरेलू हवाई यातायात लगातार बढ़ रहा है।

इस साल नवंबर में 1.05 करोड़ लोगों ने हवाई यात्रा की है। यह सालाना 64 फीसदी की बढ़ोतरी है। अक्टूबर में हवाई यात्रियों की संख्या 90 लाख और सितंबर में करीब 70 लाख थी। गौरतलब है की कोरोना महामारी के दौरान के ये आंकड़े है।

अगर महामारी न होती तो यह आंकड़े काफी बढ़ सकते थे। इसी बिच अब खबर आई है कि हवाई यात्रियों की इस बढ़ी हुई संख्या ने सरकार के लिए कमाई का नया रास्ता खोल दिया है। सरकार ने विनिवेश की कड़ी में 25 हवाई अड्डों को शामिल किया है।

इसका मतलब है कि राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना में शामिल 25 हवाई अड्डों का भी निजीकरण किया जाएगा। अगले तीन साल में 25 हवाईअड्डे निजी हाथों में जाएंगे। हवाई अड्डे का चयन वार्षिक यातायात और प्रस्तावित पूंजीगत व्यय योजना के आधार पर किया गया है। इन हवाई अड्डों में पटना, सूरत, रांची, चेन्नई, भुवनेश्वर, वाराणसी, इंदौर, रायपुर, नागपुर,भोपाल और देहरादून आदि शामिल हैं।

आखिर सरकार हवाई अड्डों का निजीकरण क्यों कर रही है ? पिछले साल से शुरू कोरोना महामारी का सबसे बड़ा प्रभाव हवाई यातायात पर पड़ा है। पिछले एक साल में 137 हवाई अड्डों में से 133 पर कोरोना महामारी का असर पड़ा है। अधिकांश हवाईअड्डे पिछले तीन वित्तीय वर्षों से लगातार घाटे में चल रहे हैं।

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