Agriculture News :इस साल बारिश की लहर के कारण महाराष्ट्र में किसान सचमुच परेशान हो गए हैं। जुलाई और अगस्त में भारी बारिश के कारण खरीफ मौसम की खड़ी फसलें क्षैतिज हो गईं। कुछ किसान भारी बारिश से अपनी फसल बचाने में कामयाब रहे। लेकिन वापसी की बारिश ने किसानों से बची हुई फसल भी छीन ली।

फसल कटाई के समय बारिश हुई तो किसानों को काफी नुकसान हुआ है। इस बीच, किसान रबी सीजन से खरीफ सीजन में हुए नुकसान की भरपाई के लिए तैयार हैं। विशेष रूप से, भारी बारिश के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए सरकार किसानों को रबी सीजन के बीज सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है।

सरकार की ओर से महाबीज की 50 प्रतिशत सब्सिडी पर किसानों को रबी सीजन के बीज उपलब्ध कराये जा रहे हैं| सरकार ने सब्सिडी पर बीज उपलब्ध कराने का अच्छा निर्णय लिया है ताकि किसान भारी बारिश से उबर सकें और रबी सीजन के दौरान खरीफ सीजन के दौरान हुए नुकसान की भरपाई कर सकें।

हालांकि, यह पाया गया है कि, जो बीज सरकार से सब्सिडी पर मिल रहे हैं, वे काफी प्रभावित हैं। वर्धा जिले में इस तरह की बात सामने आई है, वहीं किसानों के मुताबिक इस तरह की चीज राज्य के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल सकती है| किसान भाइयों ने सब्सिडी पर उपलब्ध बीजों के अंदर देखा तो पाया कि, बीज पहले ही कीड़ों ने काट लिया था। इसलिए इस बार किसानों द्वारा बड़ा सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सरकार किसानों का मजाक उड़ा रही है।

किसान भाइयों को रबी सीजन के लिए 30 किलो बीज की बोरी 50 प्रतिशत सब्सिडी पर मिल रही है। चना बीज का यह किलो बैग किसानों को 1500 रुपये की सब्सिडी पर मिल रहा है। लेकिन 1500 रुपये देने के बाद भी किसानों को संक्रमित बीज मिल रहे हैं| इसको लेकर किसानों की प्रतिक्रिया है कि, अगर सब्सिडी नहीं ली होती तो वे इसे वहन कर पाते। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, किसान अच्छी गुणवत्ता वाले, स्वच्छ, पानी रहित, दानेदार, कीट मुक्त बीज बोएं।

जिससे किसानों को अधिक उत्पादन मिल सके। हालांकि, सरकार किसानों को रोगग्रस्त और टीका बीज दे रही है। इसे लेकर सवाल पूछा जा रहा है कि, क्या सरकार किसानों का मजाक उड़ा रही है| इस बीच शासन और बीज के संबंध में तुकाराम महाराज की ‘शुद्ध बीजापोती फीजी रसल गोमती’ को याद किया जाता है। तुकाराम महाराज कहते हैं कि, बीज अच्छे होंगे तो फसल अच्छी होगी और सरकार की सोच अच्छी होती तो इस तरह की बात सामने नहीं आती।

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