Soybean Farming Tips :सोयाबीन (Soybean Crop) खरीफ मौसम (Kharif Season) की एक प्रमुख फसल है और इस फसल की खेती हमारे राज्य में बड़े पैमाने पर की जाती है। सोयाबीन को एक प्रमुख तिलहन फसल के साथ-साथ नकदी फसल (Cash Crop) के रूप में जाना जाता है।

ऐसे में इस फसल की खेती (Soybean Farming) से किसानों को काफी पैसा (Farmer Income) मिल रहा है। हालांकि सोयाबीन की फसल में फसल प्रबंधन (Soybean Crop Management) भी समय पर करने की जरूरत है।

दोस्तों ,आज हम यह जानने की कोशिश करने जा रहे हैं कि 75 दिन की सोयाबीन की फसल में कौन क्या काम करे ? या किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? तो दोस्तों बिना समय बर्बाद किए आइए जानते हैं, इस बहुमूल्य जानकारी के बारे में विस्तार से। सोयाबीन की फसल के लगभग 60 से 75 दिनों में दूसरी पीढ़ी का प्रकोप ऊपरी पत्तियों पर दिखाई देता है।

इस संबंध में यह सलाह दी जाती है कि, फसल की इस अवस्था में घुन से ज्यादा नुकसान होने की संभावना बहुत कम होती है। इसके नियंत्रण के लिए कीटनाशकों का छिड़काव आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है, इसलिए घबराएं नहीं और पेड़ के प्रभावित हिस्से को काटकर नष्ट कर दें।
जहां सोयाबीन की फसल में दाना भरना शुरू हो गया है, वहां इंडोक्साकार्ब 15.8 ई.सी. (333 मिली / हेक्टेयर) या टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एससी। (250-300 मिली/हेक्टेयर) या इमैमेक्टिन बेंजोएट (425 मिली/हेक्टेयर) या लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 04.90 सी.एस. (300 मिली/हेक्टेयर) छिड़काव करना चाहिए।

किसानों से अपेक्षा की जाती है कि, वे बीज उत्पादन के लिए बोई गई सोयाबीन की फसलों पर फफूंदनाशकों का छिड़काव करें। इसके लिए टेबुकोनाज़ोल 25.9% ईसी (625 मिली/हेक्टेयर) या टेबुकोनाज़ोल + सल्फर (1.25 किग्रा/हेक्टेयर) या पाइरोक्लोस्ट्रोबिन 20% wg (375-500 g/ha) या पाइरोक्लोस्ट्रोबिन + ipixconazole 50g/l s.e. (750 मिली/हेक्टेयर) या फ्लूऑक्सापायरॉक्साइड + पायरोक्लोस्ट्रोबिन (300 ग्राम/हेक्टेयर) का छिड़काव करना चाहिए। यह कवक रोगों (राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट और एन्थ्रेक्नोज) को नियंत्रित करेगा।

सोयाबीन की फसल में पीला मोझॅक रोग नियंत्रण-

पीले मोझॅक रोग के नियंत्रण के लिए रोगग्रस्त पौधों को तुरंत खेत से हटाने और सफेद मक्खी को नियंत्रित करने की सलाह दी जाती है। दोस्तों, सफेद मक्खी इस रोग की वाहक है। सफेद मक्खी को नियंत्रित करने के लिए पूर्व-मिश्रित कीटनाशक थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा साइहेलो थ्रिन (125 मिली / हेक्टेयर) या बीटासीफ्लुसीन + इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली / हेक्टेयर) का छिड़काव करना चाहिए। दोस्तों जानकार लोगों के अनुसार यह स्प्रे तना मक्खी को भी नियंत्रित कर सकता है। यह भी सलाह दी गई है कि, किसानों को सफेद मक्खी को नियंत्रित करने के लिए अपने खेतों में विभिन्न स्थानों पर पीले चिपचिपे जाल लगाने चाहिए।
किसान मित्रों, यहां दी गई जानकारी किसी भी हाल में अंतिम नहीं होगी। किसी भी फसल पर किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी होगा।

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