Soybean Bajarbhav : महाराष्ट्र में सोयाबीन की खेती का क्षेत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सोयाबीन की खेती लगभग पूरे खानदेश, मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र, विदर्भ राज्य में की जाती है।

राज्य के अधिकांश किसान आर्थिक रूप से सोयाबीन की नकदी फसल पर निर्भर हैं। इस बीच, कल हुई नीलामी में सोयाबीन के बाजार भाव में गिरावट आई। दरअसल, अभी कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने तिलहन और खाद्य तेल पर स्टॉक की सीमा हटा दी थी|

इससे सोयाबीन बाजार को राहत मिली है। सोयाबीन की कीमतों में मामूली तेजी रही। लेकिन कल कुछ मंडी समितियों में सोयाबीन के भाव गिरे, जबकि कुछ बाजार समितियों में बाजार भाव स्थिर रहे। कुल मिलाकर कल सोयाबीन बाजार मिलाजुला रहा।

जानकारों के मुताबिक प्रसंस्करण संयंत्रों से सोयाबीन की मांग कम होने और कीमतों में कमी के कारण बाजार समिति में सोयाबीन का बाजार भाव गिर गया। कल शुक्रवार को हुई नीलामी में सोयाबीन का औसत बाजार भाव 5,300 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर 5,600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका।

निश्चित रूप से मौजूदा बाजार मूल्य सोयाबीन किसानों की अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। ज्यादातर किसान सोयाबीन के कम से कम 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए जानकारों ने सोयाबीन की कीमत को लेकर बड़ा बयान दिया है|

जानकारों के मुताबिक बाजार के मौजूदा हालात को देखते हुए सोयाबीन का बाजार भाव 5000 रुपये प्रति क्विंटल से 6000 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगा| बेशक 6000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों की इच्छा पूरी होगी, लेकिन अगर बाजार का औसत भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल से कम रहा तो जाहिर तौर पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा|

दरअसल पिछले साल सोयाबीन की रिकॉर्ड अच्छी कीमत मिली थी। किसान चाहते थे कि इस साल भी सोयाबीन का अच्छा बाजार भाव मिले। लेकिन सोयाबीन की कीमत की तुलना पिछले साल के बाजार भाव से करें तो सोयाबीन को फिलहाल काफी किफायती दाम मिल रहा है|

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