Wheat Farming : देश के ज्यादातर हिस्सों में खरीफ सीजन की फसलों की कटाई देर से पूरी हुई है। जिन किसान भाइयों ने धान की फसल बोई थी, उनकी कटाई देर से हुई है। अब खरीफ सीजन की देरी से कटाई करने वाले किसान अब रबी सीजन खासकर गेहूं की बुआई में देरी कर रहे हैं।

जानकारों के मुताबिक अगर किसान देर से गेहूं बोएंगे तो उनकी उत्पादकता और उपज में कमी आएगी। खरीफ फसलों की देर से कटाई के कारण किसानों के पास इतना समय नहीं है कि वे गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार कर सकें।

इससे किसानों को गेहूं की जुताई और बुवाई में देरी हो सकती है और स्वाभाविक रूप से उपज कम होने का खतरा है। लेकिन अगर किसान बिना जुताई के गेहूं की बुवाई करेंगे तो उत्पादकता और उत्पादन में गिरावट का डर खत्म हो जाएगा। यदि जीरो टिलेज फार्मिंग यानी जीरो टिलेज से गेहूं की बुआई की जाती है तो मौजूदा स्थिति में गेहूं की बुआई करने से किसानों को फायदा होगा।

धान की खेती करने वाले किसान धान की कटाई के बाद बिना जुताई किए गेहूं की बिजाई कर सकेंगे। इसके लिए किसानों को जीरो टिलेज मशीन से गेहूं की बुवाई करनी होगी।

विशेषज्ञ बताते हैं कि धान की फसल के बाद जीरो टिलेज से गेहूं की बुआई करना ज्यादा लाभदायक होता है। जानकारों के अनुसार धान उगाने वाले क्षेत्र में पर्याप्त नमी होती है जो जीरो टिलेज से गेहूं बोने में लाभदायक है। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर धान के खेतों में जीरो टिलेज मशीन से गेहूं बोया जाता है तो गेहूं की बुवाई के बाद सिंचाई करने की जरूरत नहीं है|

क्या है जीरो टिलेज तकनीक? पारंपरिक तकनीक में गेहूं की बुवाई के लिए खेत की 5 से 6 बार जुताई की जाती है, लेकिन इससे ज्यादा फायदा नहीं होता है, बल्कि मिट्टी की सतह अंदर से ढीली हो जाती है और गेहूं के बीजों के अधिक घुसने के कारण यह अच्छी तरह से अंकुरित नहीं हो पाता है। इससे गेहूं पतला हो जाता है, उपज कम हो जाती है और लाभप्रदता कम हो जाती है जिससे लागत बढ़ जाती है।

खेतों की जुताई और बुवाई का पारंपरिक काम बहुत महंगा और समय लेने वाला है। लेकिन जीरो टिलेज पद्धति इसके ठीक विपरीत है। इस तकनीक से न केवल बुवाई के समय में 10 से 20 दिन की बचत होती है, बल्कि बेहतर उत्पादकता के साथ अतिरिक्त लागत भी कम आती है।

जीरो टिलर से रोपण जीरो टिलर एक आधुनिक कृषि उपकरण है, जो ट्रैक्टर द्वारा चलाया जाता है। इस उपकरण से गेहूँ को खेत में कतारों में बोया जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं के बीज बिना जुताई के बेहतर तरीके से अंकुरित होते हैं। इससे कम समय और कम मेहनत में बेहतर परिणाम मिलते हैं। एक शोध में यह बात सामने आई है कि जीरो टिलर की मदद से गेहूं को हर तरह की मिट्टी में बोया जा सकता है।

वहीं जीरो टिलर से गेहूं बोने वाले किसान भी इसे फायदे का सौदा बताते हैं। पारंपरिक तरीके से गेहूं की खेती के लिए तीन बार जुताई की जाती है और फिर गेहूं बोया जाता है। और शून्य जुताई तकनीक का उपयोग करते हुए, सीधी बुवाई, खाद, उर्वरक सहित सब कुछ खेतों में लगाया जाता है।

इस प्रकार बीज कम समय में अंकुरित हो जाते हैं और फसल पहले पैदा हो जाती है। इस मशीन के प्रयोग से किसानों को प्रति हेक्टेयर 1000 से 1500 रुपये तक का लाभ मिलता है। जानकारों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बाजार में जीरो टिलेज मशीन 30 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक उपलब्ध है| किसान इस मशीन को लीज पर लेकर अपने गेहूं की बुआई कर सकते हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *