Onion Farming: प्याज को नकदी फसल के रूप में जाना जाता है। महाराष्ट्र में इस फसल की व्यापक रूप से खेती की जाती है। महाराष्ट्र के अतिरिक्त देश के अन्य राज्यों में प्याज की खेती विशेष रूप से उल्लेखनीय है। नगदी फसल के रूप में प्याज से भी किसान भाइयों को अच्छी आमदनी होती है।

जानकारों के मुताबिक उन्नत किस्म के प्याज की खेती करने से किसान ज्यादा कमाई कर सकते हैं। ऐसे में आज हम अपने किसान पाठक मित्रों के लिए प्याज की कुछ किस्मों की जानकारी जानने जा रहे हैं जिनकी उत्पादकता 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है|

तो दोस्तों बिना समय गवाए आइए जानते हैं देश में उच्च उत्पादन के लिए जानी जाने वाली प्याज की बेहतरीन किस्में।

अर्ली ग्रैनो :- किसान अर्ली ग्रैनो किस्म के प्याज की बुआई कर प्रति हेक्टेयर 500 क्विंटल तक प्राप्त कर सकते हैं। इस किस्म की प्याज की फसल 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म के प्याज का रंग हल्का पीला होता है, इसलिए इसे अक्सर सलाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पूसा रत्नार किस्म का प्याज :- इस किस्म की खेती करने पर किसानों को प्रति हेक्टेयर 400 से 500 क्विंटल उपज प्राप्त हो सकती है। इस किस्म की फसल 125 दिनों में बाजार में बिक्री के लिए तैयार हो जाती है। इस किस्म के प्याज का रंग गहरा लाल होता है।

हिसार-2 प्याज की उन्नत किस्म:- इस किस्म का प्याज रोपण के 175 दिन बाद तैयार हो जाता है। किसान इस किस्म की खेती कर 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन कर सकते हैं। इसका रंग गहरा लाल और भूरा होता है। साथ ही इसका स्वाद तीखा नहीं होता है। ऐसे में सलाद में इसका इस्तेमाल करना बेहतर होता है।

पूसा लाल प्याज की किस्म :- इस लाल प्याज की किस्म से 200 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त की जा सकती है। यह 120-125 दिनों में पक कर बाजार में बिक्री के लिए तैयार हो जाती है।

पूसा सफेद :- प्याज की इस किस्म की फसल बोने के 125 से 130 दिनों में पक जाती है। वहीं, उत्पादन 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इस किस्म का प्याज चमकदार दिखता है। जी हां, यह वही सफेद प्याज है जो हम अक्सर बाजार में देखते हैं।

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