Success Story: महाराष्ट्र के विकास के लिए अहम कदम माने जाने वाले समृद्धि हाईवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 दिसंबर को करेंगे| यानी समृद्धि हाईवे 50 फीसदी पूरा हो चुका है। इस हाईवे के पहले चरण का उद्घाटन किया जाएगा।

2016-17 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्रजी फडणवीस द्वारा इस राजमार्ग की अवधारणा प्रस्तावित की गई थी। इसे फडणवीस का ड्रीम प्रोजेक्ट कहा जाता है, जिनके पास विदर्भ के लिए हमेशा एक विजन रहा है। इसलिए इस राजमार्ग के निर्माण के लिए सरकार द्वारा शीघ्र कदम उठाए गए।

लेकिन शुरुआत में कई किसानों ने इस हाईवे का पुरजोर विरोध किया। किसानों के विरोध को देखते हुए सरकार ने जमीन का मुआवजा पांच गुना बढ़ा दिया। ऐसे में कई लोगों ने यह आशंका भी जताई कि जिन किसानों को हाईवे में जमीन मिलेगी, उनके पास करोड़ों रुपये आएंगे और किसान इस पैसे का सही इस्तेमाल नहीं करेंगे. इसलिए कहा गया कि किसानों के पास आया पैसा भी जाएगा और उनकी जमीन भी जाएगी। हालांकि समृद्धि हाईवे में अपनी साढ़े चार एकड़ जमीन गंवाने वाला युवक इन सब बातों का अपवाद बन गया है|

इस युवक ने हाईवे में खोई जमीन से दोगुनी जमीन ले ली है। बुलढाणा जिले के मेहकर तालुका के मौजे चायगांव के जितेश देशमुख की साढ़े चार एकड़ जमीन समृद्धि हाईवे में चली गई है| इसके बदले उन्हें एक करोड़ 43 लाख रुपए मिले। नितेश देशमुख के पास कुल बारह एकड़ खेती की जमीन थी जिसमें से साढ़े चार एकड़ समृद्धि हाईवे में चली गई। अब जितेश को जमीन के मुआवजे में करोड़ों रुपए मिल गए हैं। जमीन बिकने से पहले ही जितेश ने जमीन के बदले में जमीन खरीदने का फैसला कर लिया था।

इस हिसाब से उन्होंने अपने खेत से सटी साढ़े सात एकड़ जमीन खरीदी। इसके लिए उन्होंने 40 लाख रुपए दिए। बाकी के पैसे का इस्तेमाल कृषि सामग्री खरीदने के लिए किया गया था। कृषि में ड्रिप सिंचाई प्रणाली भी स्थापित की गई थी। इन पैसों से भाई की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है और उसका भाई अब टीचर की नौकरी कर रहा है। दरअसल, 2013 तक जितेश ने खेती की ओर देखा तक नहीं था। उस समय तक, उनके पिता पूरे खेत का प्रबंधन कर रहे थे। लेकिन 2013 में उनके पिता की आकस्मिक मृत्यु हो गई। अंत में पूरा परिवार जीतेश के कंधों पर आ गया। फिर उसने खेती शुरू की। दीपक खेती के अलावा अपनी ग्राम पंचायत में संचालिका का काम भी करता है।

समृद्धि हाईवे में जमीन बिकने के बाद करोड़ों रुपए आने के बाद भी जितेश अभी खेती कर रहे हैं। इसके विपरीत अब कृषि व्यवसाय बढ़ गया है क्योंकि उन्होंने बदले में साढ़े सात एकड़ नई जमीन खरीदी है। इसके अलावा, वह अभी भी एक कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में अपना काम कर रहा है| कहने का आशय यह है कि ईछा समृद्धि हाईवे में जमीन बिकने के बाद कई किसानों ने अपने व्यवसाय को नजरअंदाज करते हुए कार और बंगले जैसी चीजों में निवेश किया क्योंकि उन्हें करोड़ों रुपये मिले|

लेकिन दूसरों की तरह बिना सोचे समझे जितेश ने इस पैसे से जितनी कृषि भूमि खोई थी उससे दोगुनी कृषि भूमि खरीदने का फैसला किया और अपने व्यवसाय को और भी समृद्ध बनाने के लिए और उसने ऐसा किया। जितेश का एक छोटा सा परिवार है| जिसमें दादी, मां, छोटा भाई, पत्नी और बेटा है। फिलहाल उनके पास 15 एकड़ खेती की जमीन है। इसमें उन्होंने संतरे का बाग लगाया है और खरीप सीजन में सोयाबीन और रबी सीजन में चना की फसल काट रहे हैं।

बेशक एक तरफ समृद्धि हाईवे जैसी परियोजनाओं से पीड़ितों को करोड़ों रुपये मिलते हैं तो वे अन्य नाशवान सुविधाओं के पीछे भागते हैं। लेकिन जितेश इसका अपवाद रहा है और उसने 12 एकड़ कृषि भूमि को भूमि विनिमय की नीति अपनाकर 15 एकड़ कर दिया है और उसे कृषि से अच्छी आमदनी हो रही है। जितेश के मुताबिक जो 50 साल में संभव नहीं था वो इस हाईवे की वजह से संभव हो गया है|

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