Fish Farming : मछली उत्पादन में भारत चीन और जापान के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर है। मत्स्य पालन (Fishery) किसानों के लिए एक बहुत ही लाभदायक व्यवसाय के रूप में उभर रहा है। ऐसे में किसानों (Farmer) के सामने यह सवाल है कि, उन्हें किस मछली (Fish Breed) से अच्छा मुनाफा मिल सकता है। इसके लिए मंगुर मछली पालन (Mangur Fish Farming) एक अच्छा विकल्प होगा।

यह मीठे पानी की मछली है। इसे कैट फिश (Cat Fish) की प्रजाति के रूप में भी जाना जाता है। मंगुर मछली पकड़े जाने के बाद भी कम पानी में आसानी से लंबे समय तक जीवित रह सकती है। बाजार में यह मछली जिंदा और हमेशा ताजा दिखती है। इसलिए बाजार में हमेशा आम की मछली की डिमांड रहती है। तो आइए इस लेख में जानें कि, मंगुर मछली का प्रजनन कैसे किया जाता है।

मंगुर मछली की विशेषताएं –

यह कम तापमान और कम ऑक्सीजन पर भी बढ़ सकता है।

यह प्रोटीन और आयरन से भरपूर होता है।

इसमें फैट भी कम होता है।

मंगुर मछली का परिवहन बहुत आसान है।

मंगुर मछली पालन के लाभ –

यह मछली उथले, दलदली, कम पानी और प्रतिकूल वातावरण में अच्छी तरह से विकसित होती है।

हालांकि पानी में ऑक्सीजन की कमी है, लेकिन इन मछलियों को नुकसान नहीं होता है।

अन्य मछलियों की तुलना में इनके प्रबंधन और पालन-पोषण की लागत भी कम होती है।

अन्य मछलियों की तुलना में इसकी कीमत भी बाजार में अच्छी है।

नेवला मछली के लिए तालाब का निर्माण –

इसके लिए एक एकड़ का तालाब काफी है।

तालाब के लिए 7 से 8 pH वाली मिट्टी चुनें।

कुंड में केवल शुद्ध पानी ही उपलब्ध कराएं।

मछली के लिए चारा –

यह मछली शाकाहारी और मांसाहारी दोनों है।

भोजन के रूप में सूखी मछली, मछली का चूर्ण, सरसों की चटनी, चावल की चटनी आदि का सेवन करना चाहिए।

उनकी डाइट में भी 30 से 35 प्रतिशत प्रोटीन होना चाहिए।

मंगुर मछली उत्पादन और खर्च –

5 से 6 महीने में मंगूर मछली 100 से 120 ग्राम तक पहुंच जाती है। एक हेक्टेयर के तालाब से 3 से 4 टन मछलियां पैदा हो सकती हैं। बाजार में इसकी कीमत 200 से 300 रुपये प्रति किलो है। लागत की बात करें तो आम की मछली पालन में प्रति हेक्टेयर 2 लाख रुपये का खर्च आता है। इससे आप आसानी से 3-5 लाख रुपये कमा सकते हैं।

संक्षेप में, मंगूर मछली पालन कम लागत और कम समय के साथ अच्छा लाभ प्रदान करता है। छोटे और सीमांत किसान भी छोटे तालाबों में मछली पालन कर आसानी से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इसके लिए सरकार मत्स्य संपदा योजना के तहत सब्सिडी भी देती है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *