Aurangabad Successful Farmer :महाराष्ट्र में किसान अब पारंपरिक खेती के तरीकों से मुंह मोड़ रहे हैं। बलीराजा अब समय बीतने के साथ कृषि में बदलाव का प्रयोग कर रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इस प्रयोग से किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है। मराठवाड़ा के औरंगाबाद जिले में भी अब किसानों ने तरह-तरह के प्रयोगों से आर्थिक समृद्धि हासिल की है| जिले के खुल्ताबाद तालुका के गाले बोरगांव के एक किसान ने भी जेरेनियम की खेती शुरू की है क्योंकि वह कुछ अलग करना चाहता था।

दिलचस्प बात यह है कि पंचक्रोशी में यह प्रयोग भले ही नया हो, लेकिन इस समूह ने इस फसल की खेती से लाखों की कमाई कर सबका ध्यान खींचा है| इस प्रायोगिक किसान का नाम गणेश खोसरे है और ये पिछले तीन साल से जेरेनियम की खेती कर रहे हैं| गणेश के मुताबिक पहले वे पारंपरिक तरीके से खेती करते थे।

हालांकि, पारंपरिक फसल प्रणालियों में, उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है और उपज में कमी आई है। इससे उन्होंने सोचा कि हमें ऐसी फसलों की खेती करनी चाहिए जिनकी बाजार में हमेशा मांग रहती है। तो उन्होंने क्या खोजना शुरू किया। इसी बीच एक दिन यू-ट्यूब पर एक वीडियो देखते हुए उनकी नजर जेरेनियम की खेती पर एक वीडियो पर पड़ी। वहीं से उन्हें इस कृषि के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई।

तो क्या उन्होंने इस कृषि की सारी एबीसीडी समझने की कोशिश की। इसी बीच उन्हें पता चला कि अहमदनगर में एक किसान ने जेरेनियम की खेती का सफल प्रयोग किया है, तो वह उस किसान के जेरेनियम प्लाट को देखने के लिए अहमदनगर के पास गए।

इस यात्रा के दौरान उन्होंने जेरेनियम की खेती की बारीकियों को समझा और घर लौटने पर जेरेनियम की खेती शुरू की। गणेश ने जेरेनियम की खेती के लिए एक लाख रुपये प्रति एकड़ ड्रिप और खाद के साथ-साथ मजदूरी के रूप में खर्च किए। इस फसल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन फसलों पर पशुओं का कोई खतरा नहीं होता है, साथ ही लागत में भी बचत होती है क्योंकि ये फसलें रोगों और कीड़ों से प्रभावित नहीं होती हैं।

गणेश द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक उन्हें पहले साल एक लाख बीस हजार, दूसरे साल एक लाख 60 हजार और अब इस साल जेरेनियम की खेती से दो लाख की कमाई होने की उम्मीद है| अगर और सही प्लानिंग की जाए तो उत्पादन का आंकड़ा और बढ़ सकता है। गणेश के मुताबिक उन्होंने मुंबई की एक कंपनी के साथ करार किया है और अब जेरेनियम की पत्तियों से तेल का उत्पादन कर उन्हें स्थायी आमदनी हो रही है|

दिलचस्प बात यह है कि गणेश जेरेनियम की पत्तियों से तेल निकालने के लिए डिस्टिलेशन प्लांट लगाना चाहते हैं। इसका मतलब यह है कि जेरेनियम उगाने वाले अन्य किसानों को भी इससे फायदा होगा। मराठवाड़ा में किसानों की आत्महत्या की बढ़ती दर को देखते हुए एक ओर निश्चित रूप से चिंता व्यक्त की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कई प्रायोगिक किसान हैं, जिन्हें कृषि से अच्छी आमदनी हो रही है|

निश्चय ही किसान भाई कृषि में ऐसा शानदार प्रयोग करें तो उन्हें स्थायी आय प्राप्त हो सकती है और महाराष्ट्र से किसान आत्महत्या का कलंक मिट सकता है। इसके लिए निश्चित रूप से किसानों को प्रोत्साहित करने का मकसद सरकार के लिए भी कुछ उपायों की योजना बनाना है। इस बीच गणेश जी का यह प्रयोग औरों के लिए जरूर प्रेरणादायी होगा।

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